सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान ऊना के केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष हितेश गांधी को झटका लगा। उन्होंने अदालत में दलील दी कि सीबीआई की जांच अधूरी है और कई संस्थानों से संबंधित सप्लीमेंट्री चार्जशीट लंबित हैं। इसलिए चार्ज (आरोप) तय करने की प्रक्रिया को रोका जाए। चार्ज तय करना उनके अधिकारों का हनन होगा। हालांकि, विशेष न्यायाधीश (सीबीआई) डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा ने इस दलील को सुनवाई में देरी का प्रयास बताते हुए खारिज कर दिया।
अदालत ने साफ कहा कि चालान नंबर-1 में जांच पूरी हो चुकी है। अब चार्ज तय करने का समय है। अदालत ने इस मामले को 14 नवंबर के लिए सूचीबद्ध किया है। उस दिन चार्ज फ्रेमिंग की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। साथ ही अरविंद राज्टा और हितेश गांधी को अगली सुनवाई में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि 7 मई 2019 को दर्ज हुआ यह मामला अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस घोटाले में सीबीआई अब तक 12 चार्जशीट दाखिल कर चुकी हैं।