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शोध में खुलासा: हिमाचल में पांच साल में 34 बार रहा रोगों का प्रकोप, दूषित पानी जिम्मेवार

Tue, 07 Apr 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में 34 बार संक्रामक रोग के प्रकोप दर्ज किए गए, इनमें 3,937 लोग प्रभावित हुए और दो लोगों की मौत हुई। 
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पार्किंसन बीमारी - फोटो : अमर उजाला/एजेंसी
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश में पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं होने से लोग संक्रामक रोगों की चपेट में आ रहे हैं। वर्ष 2021 से 2025 के बीच राज्य में 34 बार संक्रामक रोग के प्रकोप दर्ज किए गए, इनमें 3,937 लोग प्रभावित हुए और दो लोगों की मौत हुई। आईजीएमसी के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अमित सचदेवा, डॉ. नवदीप कौशल, सचिन कुमार और अंजू सचदेवा की ओर से किए गए शोध में यह खुलासा हुआ है। अध्ययन में 2024 को संक्रामक रोगों के लिहाज से सबसे गंभीर वर्ष माना गया, अकेले 17 प्रकोप सामने आए। इसी वर्ष दो मौतें भी दर्ज की गईं।

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तीव्र दस्त सबसे अधिक फैलने वाला रोग रहा, इसके कुल 2,796 मामले दर्ज किए गए, जो कुल मामलों का 71 प्रतिशत है। इसके बाद हेपेटाइटिस-ए के 702 मामले (17.8 प्रतिशत) सामने आए। वहीं डेंगू के मामले 9.6 प्रतिशत रहे। अन्य बीमारियों में पीलिया और एचएफएमडी (हैंड, फुट एंड माउथ डिजीज) के मामले अपेक्षाकृत कम पाए गए। हमीरपुर, सोलन और मंडी सबसे अधिक प्रभावित रहे। मंडी जिले में सबसे अधिक 11 प्रकोप सामने आए, जबकि सोलन में प्रकोपों की संख्या कम होने के बावजूद मामलों की संख्या अधिक रही। इससे बड़े स्तर के संक्रमण की आशंका जाहिर होती है। मानसून (जून से सितंबर) और पोस्ट-मानसून (अक्टूबर-नवंबर) के दौरान संक्रमण का खतरा सबसे अधिक रहा। इस अवधि में कुल मामलों के 60 प्रतिशत से अधिक सामने आए। अक्तूबर और नवंबर महीनों में संक्रमण अपने चरम पर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में जल स्रोतों का दूषित होना, स्वच्छता की कमी और मौसम में बदलाव इन प्रकोपों के प्रमुख कारण हैं।

रोग                     मामले       (प्रतिशत)
तीव्र डायरिया        2796           71.0%
हेपेटाइटिस-ए       702            17.8%
डेंगू                     379            9.6%
पीलिया                 38             1.0%
एचएफएमडी         22             0.6%

यह दिए हैं सुझाव
राज्य में निगरानी प्रणाली को और मजबूत किया जाए, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाए, डेंगू प्रभावित क्षेत्रों में मच्छर नियंत्रण और उच्च जोखिम वाले इलाकों में हेपेटाइटिस-ए टीकाकरण पर भी विचार करने की जरूरत, समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो भविष्य में ऐसे प्रकोपों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

हिमाचल के लोगों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए 19 हजार पेयजल स्कीमों को फिल्टर किया जाना है। जल शक्ति विभाग इसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। 2000 करोड़ का यह प्रोजेक्ट है। मई महीने से इसे जमा कराया जाना है, ताकि पैसा जारी होकर स्कीमों में फिल्टरेशन का काम शुरू किया जा सके। - धर्मेंद्र गिल, ईएनसी (प्रोजेक्ट) जल शक्ति विभाग
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हिमाचल में जलजनित रोग के चलते अस्पताल प्रशासन को दवाओं का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा लोगों को अपने घरों में भी उबालकर पानी पीने की सलाह दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व कर्मचारी गांव - गांव जाकर लोगों को जलजनित रोग के बारे में जागरूक कर रहे हैं।- गोपाल बैरी, निदेशक, स्वास्थ्य विभाग
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