हिमाचल के जाने माने पर्यावरणविद् कुलभूषण उपमन्यु का कहना है कि हिमाचल की झीलों और बांधों में एनारोबिक अपघटन से कार्बन डाइऑक्साइड के मुकाबले 8 गुणा अधिक मीथेन पैदा हो रही है। झीलों की सतह पर जमा हुआ अपशिष्ट बिना ऑक्सीजन के सड़ता है, जिससे मीथेन गैस का उत्सर्जन होता है। मीथेन जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे बड़ा कारक है। हिमाचल के पर्यटन स्थलों पर वाहनों की बढ़ती संख्या भी जलवायु परिवर्तन का कारण बन रही है। वाहन बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है। वाहनों से निकलने वाली ग्रीनहाउस गैसें वातावरण में गर्मी बढ़ा रही हैं। मैदानों में ग्रीनहाउस गैसें फैल जाती हैं जबकि हिमालयी क्षेत्रों में पहाड़ों के बीच फंस जाता है और अधिक नुकसान करती हैं।
रोप-वे बने परिवहन का विकल्प
हिमाचल में रोप-वे परिवहन का विकल्प बनना चाहिए। पेट्रोल-डीजल से चलने वाले वाहनों से नुकसान हो रहा है। रोप-वे पर शुरुआत में लागत भले ही अधिक है, लेकिन पर्यावरण सरंक्षण के लिए यह उपयोगी हैं। पर्यटन स्थलों पर आने वाले सैलानियों को सुरक्षित और सस्ता सार्वजनिक परिवहन विकल्प देना होगा। स्थानीय स्तर पर एक बार फिर साइकिल के प्रयोग को बढ़ावा देने की भी जरूरत है।
क्या कहते हैं मौसम विज्ञानी
सेवानिवृत्त मौसम विज्ञानी डॉ. मनमोहन सिंह ने बताया कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण पानी का वाष्पीकरण तेजी से बढ़ रहा है। घने क्यूम्यलोनिम्बस बादल जिन्हें थंडरहेड्स भी कहा जाता है। गरज और तूफान के साथ जुड़े होते हैं। ये बादल बहुत ऊंचे और विशाल होते हैं और बिजली, भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं जैसी गंभीर मौसम की स्थिति पैदा कर सकते हैं। बंगाल की खाड़ी से आ रहीं पूर्वी हवाएं भी इसका कारण हैं।
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