संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। गवास गांव में शांत महायज्ञ के एक साल बाद शांतड़ी अनुष्ठान देव आगमन के साथ शुरू हो गया है। अनुष्ठान में आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। देवताओं के आगमन के साथ शुरू हुए इस अनुष्ठान में मंगलवार रात को विशेष रूप से महिलाओं के कार्यक्रम का आयोजन हुआ। पूरी रात ढोल–नगाड़ों की थाप पर माइनस डिग्री तापमान में स्थानीय महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में नृत्य किया। वहीं, हजारों खूंदों ने इस आयोजन में भाग लेकर माहौल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। कड़ाके की ठंड भी रातभर तंबुओं में ठहरे श्रद्धालुओं के उत्साह को कम नहीं कर सकी। अनुष्ठान स्थल पर तापमान दिन के समय 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि रात को यह शून्य से पांच डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया। इसके बावजूद दूरदराज से पहुंचे हजारों खूंद गांव में लगाए गए तंबुओं में रात गुजार रहे हैं और लगातार धार्मिक रस्मों में शरीक हो रहे हैं। देव मिलन के इस अवसर पर पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ आधुनिक मनोरंजन का रंग भी देखने को मिला। गांव में दिन के समय डीजे की धुनों पर भी लोग खूब झूमे। युवा, बुजुर्ग और बच्चे सभी ने सामूहिक नृत्य कर अपनी खुशी प्रकट की।
शांतड़ी की मेजबानी कर रहे देवता गुड़ारू महाराज गवास के प्रति श्रद्धा रखने वाले नौ गांवों के ग्रामीणों ने अतिथियों और खूंदों के लिए भोजन, अलाव और ठहरने की बेहतर व्यवस्था की है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि शांत महायज्ञ की तर्ज पर शांतड़ी अनुष्ठान भी पूरे विधि–विधान से संपन्न किया जा रहा है। अनुष्ठान में देव नृत्य, धार्मिक पूजा और लोक संस्कृति के कार्यक्रमों का दौर लगातार जारी है।
गवास गांव में शांतड़ी अनुष्ठान में पहुंचे देवताओं के खूंद। संवाद
गवास गांव में शांतड़ी अनुष्ठान में पहुंचे देवताओं के खूंद। संवाद
गवास गांव में शांतड़ी अनुष्ठान में पहुंचे देवताओं के खूंद। संवाद
गवास गांव में शांतड़ी अनुष्ठान में पहुंचे देवताओं के खूंद। संवाद
गवास गांव में शांतड़ी अनुष्ठान में पहुंचे देवताओं के खूंद। संवाद
गवास गांव में शांतड़ी अनुष्ठान में पहुंचे देवताओं के खूंद। संवाद