सरकार ने आदर्श अस्पताल का दिया है दर्जा, पैरा मैडिकल स्टाफ व नर्सों के पद भी खाली
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। सिविल अस्पताल राेहड़ू में एक साल से सिविल सर्जन का पद खाली है। इस कारण कई महीने से लोगों के ऑपरेशन लटके हैं। इस कारण लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना अस्पताल प्रबंधन के लिए मुश्किल हो गया है। सिविल अस्पताल राेहड़ू में रोजाना 800 के करीब ओपीडी होती है। हालांकि, अन्य पदों पर विशेषज्ञ चिकित्सक जरूर तैनात हैं। अस्पताल में जनरल सर्जन का पद करीब एक साल से रिक्त है। अस्पताल में किसी तरह के ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। पेट की पथरी, अन्य बीमारियों के छोटे से ऑपरेशन के लिए भी लोगों को शिमला के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सरकार ने रोहड़ू अस्पताल को आदर्श अस्पताल का दर्जा दिया है। यहां ऑपरेशन नहीं होने से रोहड़ू, जुब्बल, चिड़गांव, डोडरा-क्वार सहित हिमाचल की सीमा के साथ लगते उत्तराखंड के गांवों के लोग भी प्रभावित हो रहे हैं। ऑपरेशन करवाने के लिए लोगों को मजबूरन निजी अस्पतालों में भारी भरकम पैसे देने पड़ रहे हैं। अस्पताल में पैरा मैडिकल स्टाफ व नर्सों के पद भी खाली चल रहे हैं।
आउटसोर्स नौ नर्सें का बढ़ा सेवाकाल
सिविल अस्पताल रोहड़ू में आउटसोर्स पर तैनात नौ नर्सों का कार्यकाल 28 फरवरी को समाप्त होने वाला थी। इनके पद खाली होने के बाद अस्पताल के अन्य वार्डों में ताले बंदी की नौबत सामने खड़ी हो चुकी थी। अस्पताल प्रबंधन ने स्वास्थ्य विभाग से इस बारे में पत्राचार किया। अब विभाग ने 31 मार्च तक आउटसोर्स पर तैनात नर्सों का सेवाकाल बढ़ा दिया है।
अस्पताल में कुछ समय से चिकित्सकों की कमी चल रही है। लंबे समय से जनरल सर्जन नहीं है। इस कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। इस संबंध में सरकार व स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। आउटसोर्स पर तैनात नर्सों की सेवांए 31 मार्च तक बढ़ा दी हैं।
- डाॅ. रविंद्र शर्मा, एमएस, सिविल अस्पताल राेहड़ू