शनिवार शाम को भूस्खलन से बड़ी चट्टानें और पेड़ गिरने से दहशत में ग्रामीण
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शिमला के नरोला गांव की तर्ज पर पहाड़ी को सुरक्षित करे परियोजना
ग्रामीणों ने भूस्खलन के लिए निर्माणाधीन परियोजना को ठहराया जिम्मेवार
संवाद न्यूज एजेंसी
नित्थर (कुल्लू)। सतलुज नदी पर निर्माणाधीन एसजेवीएन की विद्युत परियोजना से ठीक ऊपर नित्थर उपतहसील के आनस गांव को भूस्खलन से खतरा पैदा हो गया है। शनिवार शाम को गांव के ऊपर पहाड़ी से भूस्खलन का सिलसिला शुरू हो गया। भूस्खलन के कारण पहाड़ी से बड़ी-बड़ी चट्टानें और पेड़ उखड़कर गांव की ओर आ गए हैं। इससे गांव के लोग दहशत में हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से पहाड़ी को शिमला जिले के नरोला गांव की तर्ज पर सुरक्षित करने की मांग उठाई है। जानकारी के अनुसार, शनिवार देर शाम को उप तहसील नित्थर की देहरा पंचायत के आनस गांव के ऊपर की पहाड़ी से भूस्खलन हुआ। इससे विशालकाय पत्थर और पेड़ उखड़कर सड़क पर आ गए। आनस गांव में घरों तक भी बड़े-बड़े पत्थर पहुंच गए। गनीमत रही कि सड़क पर उस समय कोई गाड़ी नहीं थी और घर से महज बीस मीटर की दूरी पर पत्थर गिरे। इससे पूरी बिजली की लाइन क्षतिग्रस्त हो गई। बिजली बोर्ड के कर्मचारी और ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद लाइन को दुरुस्त किया।
स्थानीय ग्रामीण मनजीत ठाकुर, मिंटू आनंद, वीर सिंह, मनोज कुमार सहित अन्य का कहना है कि गांव को पहाड़ी से खतरा बना हुआ है। लूहरी जल विद्युत परियोजना निर्माण की भारी ब्लास्टिंग से इस पहाड़ी के पत्थर अपनी जगह से हिल गए हैं और परियोजना की टनल के ठीक ऊपर यह गांव बसा है। ऐसे में गांव पर कभी भी मुसीबत बढ़ सकती है। उन्होंने स्थाना पंचायत, प्रशासन और परियोजना प्रबंधन से जल्द संज्ञान लेकर ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने शिमला जिले के नरोला गांव की तर्ज पर गांव के ऊपर पहाड़ी को सुरक्षित करने की मांग की है। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई, तो ग्रामीण सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
रविवार को ग्राम पंचायत देहरा के उपप्रधान यशपाल कटोच और पटवारी मौके पर पहुंचे। कटोच ने कहा कि सोमवार को एसडीएम निरमंड मनमोहन सिंह आनस गांव का दौरा करेंगे और एसजेवीएनएल के अधिकारियों को मौके पर बुलाया जाएगा।