संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। बागवानी मिशन के तहत वर्ष 2017 में शुरू किया प्लांट हेल्थ क्लीनिक आज सरकारी उदासीनता की भेंट चढ़ चुका है। सेब बागवानों को आधुनिक जांच सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित इस केंद्र पर दो साल से ताले लटके हैं। हालात यह है कि जहां कभी वैज्ञानिक जांच होती थी, वहां अब महंगे उपकरण धूल फांक रहे हैं। इस क्लीनिक में सेब के पौधों में लगने वाली खतरनाक बीमारियों जैसे अल्टरनेरिया, मार्सोनिना, माइट और अन्य रोगों की सटीक जांच होती थी। साथ ही पत्तों में पोषक तत्वों की कमी का परीक्षण कर बागवानों को वैज्ञानिक सलाह दी जाती थी। इससे उत्पादन बढ़ाने में सीधा लाभ मिलता था, लेकिन परियोजना खत्म होते ही यहां तैनात तकनीशियन का पद खाली हो गया और पूरा सिस्टम ठप हो गया। बागवानों का बड़ा सवाल यह है कि जब सुविधा शुरू की गई थी, तो उसके स्थायी संचालन की कोई ठोस योजना क्यों नहीं बनाई गई। सरकार और विभागीय अनदेखी के कारण क्षेत्र के हजारों बागवानों को क्लीनिक की सुविधा नहीं मिल पा रही।
सेब की जांच के लिए काटने पड़ रहे चक्कर
बागवान राकेश चौहान, चंद्र ठाकुर, विरेंद्र सिंह सहित अन्य का कहना है कि लाखों रुपये खर्च कर क्लीनिक स्थापित किया गया। अब इस क्लीनिक को बंद करना सरकार और बागवानी विभाग की अनदेखी को उजागर करता है। क्लीनिक बंद होने से बागवानों को अब छोटी-छोटी जांच के लिए अन्य स्थानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इससे न केवल समय और पैसे की बर्बादी हो रही है, बल्कि सेब की बीमारी की पहचान समय पर न होने से फसल पर भी सीधा असर पड़ रहा है। बागवानों का कहना है कि सरकार जमीनी स्तर पर बागवानों की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं है। योजनाएं कागजों में शुरू होती हैं और कुछ समय बाद दम तोड़ देती हैं। बागवानों ने मांग की है कि जल्द क्लीनिक को दोबारा शुरू किया जाए।
इसका संचालन पहले केंद्र प्रायोजित बागवानी परियोजना के तहत किया जा रहा था। अब करीब दो साल से परियोजना बंद होने के बाद इसके संचालन को कोई कर्मचारी नहीं है, इसलिए यहां पर कोई जांच नहीं हो रही है।
डॉ. अश्विनी चौहान, एसएमएस, उद्यान विभाग