महिलाओं ने पूजा-अर्चना कर निभाई सदियों पुरानी परंपरा
द्वादशी को सात प्रकार के धान्य की बुआई से शुरू होता है पर्व
कराणा, थवोली, शमेशा समेत आनी-निरमंड के कई गांवों में हुआ आयोजन
पूजा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की है मान्यता
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आउटर सिराज के ब्राह्मण बहुल गांवों में शाख माता की परंपरा इस वर्ष भी श्रद्धा और उल्लास के साथ निभाई गई। आठ दिन तक चले पारंपरिक पर्व का मंगलवार को ऋषि पंचमी के अवसर पर समापन हुआ। महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सजकर पूजा-अर्चना की और लोकगीत गाते हुए शाख माता का बावड़ी के समीप जल में विसर्जन किया।
पं. चंद्र प्रकाश शर्मा ने बताया कि शाख माता का पर्व द्वादशी से शुरू होता है। इस दिन सात प्रकार के धान्य की बुआई कर उनकी विधिवत पूजा की जाती है। आठवें दिन ऋषि पंचमी पर उगे अंकुरों का जल में विसर्जन कर पर्व का समापन किया जाता है। मान्यता है कि शाख माता की पूजा-अर्चना से घर-परिवार में सुख-समृद्धि, खुशहाली और सौभाग्य बना रहता है।
उन्होंने बताया कि आनी क्षेत्र के कराणा, थवोली, शमेशा, ठोगी, बटाला-जलोडी, दलाश, बौरी और नित्थर, निरमंड सहित सुकेत क्षेत्र के चखाना, तुमन, शाला और अन्य गांवों में भी शाख माता का पर्व संपन्न हुआ। विसर्जन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक लोकगीत गाकर माता को विदाई दी।
आउटर सिराज क्षेत्र में बी माता और शाख माता की पूजा की परंपरा है। यह पर्व क्षेत्र की लोक संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि आधुनिकता के दौर में भी प्राचीन परंपराओं को जीवित रखना जरूरी है, ताकि भावी पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत से जुड़ी रहे।