ठियोग (रामपुर बुशहर)। प्रदेश की राजधानी शिमला के हजारों लोगों को पेयजल आपूर्ति करने वाली गिरि खड्ड में सीवेज मिल रही है। ठियोग के छैला बाजार में प्रशासन की आंखों के सामने यह सबकुछ हो रहा है। इसके बावजूद हजारों लोगों की जिंदगी से चल रहे इस खिलवाड़ को रोकने के लिए कोई पुख्ता कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
जलशक्ति विभाग के अधिकारी भी सिर्फ नोटिस देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। जानकारी के मुताबिक हाल ही छैला बाजार की ज्यादातर दुकानों, घरों और ढाबों से निकलने वाली सीवेज के लिए गिरि के किनारे की एक गड्ढा बनाया गया है। इसी गड्ढे में मोटर लगाकर रात के समय सारी सीवेज को खड्ड में बहा दिया जाता है। स्थानीय निवासी कांता देवी ने हाल ही में एक बार फिर इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि प्रशासन की लापरवाही लोगों की जिंदगी पर कभी भी भारी पड़ सकती है।
सैंज से राजधानी और ठियोग के लिए उठाया जाता है पानी
राजधानी शिमला और ठियोग के लिए इसी छैला से करीब छह किलोमीटर दूर सैंज माहीपुल से पीने का पानी उठाया जा रहा है। ऐसे में सीवेज मिलने से लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। कभी भी लोग जलजनित रोगों की गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। शिमला शहर के लिए गिरि नदी से करीब 20 (एमएलडी) पानी की आपूर्ति होती है।
गिरि में बकरों के खून का मामला भी आया था सामने
करीब आठ साल पहले भी इसी गिरि खड्ड में बकरों के खून मिलने की खबर को भी अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद भी कारोबारियों के चालान काटे गए लेकिन समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए सरकार की ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए। अब एक बार फिर यह मामला प्रकाश आया है, जिससे साफ है कि जनता की जिंदगी से खिलवाड़ बदस्तूर जारी है और प्रशासन और सरकार मूकदर्शक बने हुए हैं। छैला में रहने वाले सभी लोग खड्ड में गंदगी ठिकाने लगा रहे हैं। बरसात का मौसम आने पर बीमारियों के पनपने का खतरा अधिक बढ़ गया है। ऐसे में सरकार और विभाग को इस संबंध में उचित कदम उठाने की जरूरत है।
नहीं फैलाई जा रही गंदगी
छैला बाजार निवासी अरविंद सूद ने बताया कि उनकी ओर से गिरि खड्ड में कोई गंदगी नहीं डाली गई है। उन्होंने कहा कि हमने सिर्फ जमीन पर सीवेज के लिए टैंक बनाया है।
छैला में खड्ड में गंदगी फैलाने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। जांच के दौरान यहां मोटर भी लगी पाई गई। लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलावाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
पद्म प्रकाश क्लांटू एसडीओ, जलशक्ति विभाग