कहा-नौ मई के लिखित समझौते के बाद भी नहीं हुआ नुकसान का मूल्यांकन
देलठ, नीरथ, करांगला और बड़ाच के ग्रामीणों ने जताया रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। सतलुज नदी पर निर्माणाधीन 210 मेगावाट लूहरी जल विद्युत परियोजना से प्रभावित पंचायतों के ग्रामीणों में धूल से फसलों को हुए नुकसान और ब्लास्टिंग से मकानों में आई दरारों का सर्वे न होने से भारी रोष है। नौ मई को हुए लिखित समझौते के बावजूद परियोजना प्रभावित देलठ, नीरथ, करांगला और बड़ाच पंचायत में सर्वे का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। मंगलवार को ग्रामीणों ने किसान सभा के बैनर तले एसडीएम रामपुर कार्यालय के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान ग्रामीणों ने जल्द सर्वे पूरा कर ग्रामीणों को राहत देने की मांग उठाई।
हिमाचल किसान सभा के बैनर तले मंगलवार को एसडीएम कार्यालय के बाहर हुए विरोध-प्रदर्शन में देलठ, नीरथ, करांगला और बड़ाच पंचायत के परियोजना प्रभावित किसानों ने भाग लिया। प्रदर्शन को किसान सभा महासचिव देवकी नंद, कृष्णा राणा, प्रेम चौहान और रंजीत ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि इन पंचायतों के किसान बीते लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कई बार प्रशासन को मांग पत्र भी दिया गया है। इन मांगों पर नौ मई, 2024 को एक लिखित समझौता हुआ था। इसके अनुसार प्रशासन ने माना था कि परियोजना निर्माण से धूल से जो फसलों का नुकसान हुआ है, उसका सर्वे 20 जुलाई को किया जाएगा। वहीं, ब्लास्टिंग से मकानों में आई दरारों का मूल्यांकन एक अगस्त तक करने पर सहमति बनी थी। प्रशासन ने केवल नीरथ पंचायत में ही दरारों का मुआवजा दिया है, जिससे किसानों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष है।
15 अक्तूबर से फसलों के नुकसान के सर्वे पर बनी सहमति
प्रदर्शन के बाद किसानों की एसडीएम रामपुर निशांत तोमर के साथ बैठक हुई। बैठक में सहमति बनी कि धूल से जो फसलों को नुकसान हुआ है, उसका सर्वे 15 अक्तूबर से शुरू किया जाएगा और मकानों में ब्लास्टिंग से दरारें आई हैं, उसका सर्वे बड़ाच पंचायत के गांव बरकेली में पांच दिन में शुरू कर दिया जाएगा। करांगला और बड़ाच पंचायत के लिए 15 दिन के भीतर कमेटी का गठन कर सर्वे शुरू कर दिया जाएगा। इस मौके पर काकू कश्यप, हरदयाल कपूर, ओपी चौहान, दर्शन दास, पदम, वीर सिंह, ऋषि, देवेंद्र, दुर्गा सिंह, हरीश, जूना देवी, महेंद्र सहित अन्य मौजूद रहे।