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Rampur Bushahar News: तीन गुना बढ़ा जनजातीय भवन शिमला में कमरों का किराया

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जनजातीय क्षेत्र के हजारों लोगों पर पड़ेगी मार
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इलाज करवाने वाले और एचपीयू में पढ़ने वाले विद्यार्थी लेते हैं आश्रय


संवाद न्यूज एजेंसी

रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय क्षेत्रों के जरूरतमंद लोगों को ठहरने के लिए बनाए गए जनजातीय भवन शिमला में कमरों का किराया तीन गुना तक बढ़ गया है। सरकार के इस फैसले से जनजातीय क्षेत्र के हजारों लोगों पर आर्थिक मार पड़ेगी। खासकर इलाज और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के लिए शिमला पहुंचने वाले विद्यार्थियों को अब तीन गुना किराया चुकाना पड़ेगा। इस फैसले से जनजातीय क्षेत्रों के लोगों में खासा रोष है। लोगों ने इस भवन को उद्देश्य से हटकर कमाई का जरिया बनाने के आरोप लगाए हैं। अंतर जिला महापंचायत हांगरंग और काजा मंडल शलखर किन्नौर के अध्यक्ष संजय कुमार नंबरदार ने बताया कि जनजातीय भवन शिमला ढली के कर्मचारियों से जानकारी ली, तो पता चला कि 200 रुपये वाला कमरा अब 560 रुपये, सेमी डिलक्स 500 रुपये वाला कमरा अब 750 रुपये, सिंगल बेड जो पहले 50 रुपये में मिलता था, अब उसके 150 रुपये चुकाने होंगे। नंबरदार ने वक्त और महंगाई के हिसाब से यदि किराया बढ़ाना ही था, तो 50 से 100 रुपये तक बढ़ाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सरकार ने जनजातीय भवन का निर्माण दूरदराज क्षेत्रों के जनजातीय और गरीब वर्गों के मरीजों को शिमला में इलाज करवाने वाले, असहाय राहगीरों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में पड़ने वाले बच्चों को दााखिले के दौरान ठहरने और कई प्रकार कार्यों से शिमला पहुंचने वाले लोगों को मदद पहुंचाने के लिए किया था, लेकिन आज यह जनजातीय भवन कमाई का साधन बन गया है। उन्होंने जनजातीय सलाहकार परिषद के सदस्यों से कमरों के किराए की बढ़ोतरी का मामला सरकार के समक्ष उठाकर इसे कम करने की मांग की है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को कम दामों पर ठहरने की सुविधा मिल सके।
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वीरवार से भवन में ठहरने का किराया बढ़ गया है। ट्राइबल भवन वेलफेयर सोसायटी ने किराये में इजाफा करने का निर्णय लिया है। यहां ठहरने के अलावा दो हॉल उपलब्ध हैं, जिन्हें किसी भी कार्यक्रम, शादी ब्याह के लिए जनजातीय लोगों के लिए एक रात्रि का किराया 21 हजार 240 रुपये, जीएसटी और गैर जनजातीय वर्गों के लिए 35 हजार 400 रुपये जीएसटी निर्धारित किया है। - सुरजीत कौंडल, प्रबंधक, जनजातीय भवन शिमला ढली
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