21 अप्रैल से मेले में बढ़ेगी चहल-पहल की संभावना
कपड़े, खिलौने और खाद्य स्टॉल बने मुख्य आकर्षण
कम भीड़ से व्यापारियों को हो सकता है नुकसान
बाहरी व्यापारियों के आने से बढ़ती है बाजार की रौनक
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। 19 अप्रैल से शुरू हुए राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले के दो दिनों में व्यापारिक गतिविधियां अपेक्षा के अनुरूप रफ्तार नहीं पकड़ पाई हैं। मैदान में अभी तक बाहर से पहुंचे व्यापारियों की संख्या सीमित है। इससे मेले की रौनक भी नहीं बन सकी है।
पांच दिवसीय मेले का 19 से 23 अप्रैल तक आयोजन किया जा रहा है। इसमें खेलकूद, सांस्कृतिक कार्यक्रमों सहित विभिन्न गतिविधियों पर करीब एक करोड़ रुपये तक खर्च होने की संभावना है। ऐसे में मेले की आर्थिक सफलता काफी हद तक बाहरी व्यापारियों और उनके कारोबार पर निर्भर मानी जाती है।
लोगों का कहना है कि पहले मेला तीन दिन का होता था, हालांकि दुकानें 15 से 20 दिन तक चलती थीं। इस बार भी 21 अप्रैल से ही मेले की असली रौनक नजर आने की संभावना है। शुरुआती दिनों में स्टॉल कम लगते हैं, जबकि तीसरे दिन से बाहर के व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। इन व्यापारियों के आने से न केवल बाजार सजता है, बल्कि लोगों की भीड़ भी बढ़ती है, जिससे कारोबार में तेजी आती है।
राज्य स्तर के बड़े मेलों की आय का प्रमुख स्रोत अस्थायी स्टॉल, झूले, खानपान और हस्तशिल्प व्यापार होता है। यदि भीड़ अपेक्षा से कम रहती है तो व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है और मेले की कुल आय भी प्रभावित होती है।
रोहड़ू मेले में भी बाहरी व्यापारियों के स्टॉल आकर्षण का मुख्य केंद्र होते हैं। कपड़े, खिलौने, घरेलू सामान, स्थानीय उत्पाद और खाद्य स्टॉल लोगों को आकर्षित करते हैं। यही वजह है कि जैसे-जैसे व्यापारियों की संख्या बढ़ती है, मेले का माहौल भी जीवंत होता जाता है।
फिलहाल आयोजन समिति और स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि आगामी दिनों में व्यापारियों की संख्या में बढ़ोतरी होगी और मेले में भीड़ भी बढ़ेगी। यदि ऐसा होता है तो न केवल खर्च की भरपाई होगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।