थला और कूहल में बेबला संपर्क सड़कों का मिटा नामोनिशान
सेब को सड़क तक पहुंचाने के चुकाने पड़ रहे 170 से लेकर 200 रुपये प्रति पेटी
मंडियों तक पहुंचाने में पांच सौ से सात सौ तक अदा करने को बागवान मजबूर
बागवानों और पशु पालकों की आर्थिकी पर गहराया संकट
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। रामपुर विकास खंड की पंचायत मुनिश के थला और कूहल में बेबला संपर्क सड़कों का नामोनिशान मिटने से बागवानों और पशु पालकों की आर्थिकी पर संकट गहरा गया है। बीते दो महीनों में भारी बरसात ने ऐसा कहर बरपाया कि उरमण से थला को जाने वाली आठ किलोमीटर लंबी सड़क और कूहल पंचायत के बेबला से गांव को जोड़ने वाली सड़क को यातायात के लिए बहाल करना चुनौती बन चुका है। सड़क अवरुद्ध होने से थला गांव के बागवानों को सेब की पेटियों को सड़क तक पहुंचाने के लिए 170 से लेकर 200 रुपये मजदूरी देनी पड़ रही है। सेब की पेटी का कुल खर्च मंडियों तक पहुंचाने का 500 से 700 रुपये तक अदा करना पड़ रहा है।
सेब बहुल उक्त गांंव में हर साल हर वर्ष 40 हजार सेब की पेटियों का कारोबार होता है। यहां के बागवान वाया बाहलीधार लालसा मंडियों तक सेब पहुंचा रहे हैं। अभी करीब 10 हजार सेब की पेटियों को भरने का काम प्रगति पर है। कूहल और आसपास के गांव में बागवान बेबला में सड़क ढह जाने से खासे परेशान हैं। बगीचों से सड़क तक हजारों पेटियों को मजदूरों के माध्यम से पहुंचाने का काम जोरों पर चला है। प्रगतिशील बागवानों अजय बेश्टू, हरदयाल बेश्टू, राजवीर चौहान, प्रेम मसोई, किशोरी लाल और जगत सिंह आदि ने बताया कि सड़कों के बंद होने से खासी चपत लग रही है। पशुपालकों को भी खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है। परिवहन सेवाएं भी डेढ़ माह से ठप पड़ने से हर तरह के कारोबार पर संकट मंडराने लगा है। कुछ दिन पहले राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक नंद लाल ने लोक निर्माण विभाग को समय रहते अवरुद्ध सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।
उधर, लोक निर्माण विभाग तकलेच के सहायक अभियंता गोवर्धन शर्मा ने कहा कि बरकल जोगणी सड़क को बहाल करने का काम जारी है। थला संपर्क सड़क को जल्द मशीनरी तैनात कर छोटे वाहनों की आवाजाही के लिए बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे। बेबला में सड़क बहाल करने में समय लग सकता है।