रामपुर बुशहर। सीटू की राष्ट्रीय कमेटी के आह्वान पर रामपुर क्षेत्र में सीटू से संबंधित सभी यूनियन, जिसमें हाइड्रो प्रोजेक्ट यूनियनें, दीपक परियोजना, आउटसोर्स, मनरेगा, निर्माण, आंगनबाड़ी, मिड डे मील और अडानी एग्रो फ्रेश वर्कर यूनियन के मजदूरों ने वीरवार को केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। सीटू ने फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के लिए एकजुटता के बैज पहनकर, बैनर और तख्तियां दिखाकर अपनी मांगों के समर्थन में कार्य स्थलों पर प्रदर्शन किया।
सीटू क्षेत्रीय समन्वय समिति के संयोजक नरेंद्र देष्टा और नील दत्त शर्मा ने कहा कि वीरवार को कोरोना संक्रमण से लड़ाई में जुटे फ्रंटलाइन वर्कर्स की सुरक्षा के लिए मांग दिवस मनाया। उन्होंने कहा कि आज प्रवासी श्रमिकों के संकट और विभिन्न सरकारों की ओर से श्रमिक वर्ग के अधिकारों पर हमले के मुद्दों के साथ-साथ देश में कोरोना श्रमिकों की सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। देश में कोरोना के मामलों में वृद्धि हो रही है, फ्रंटलाइन वर्कर को कोविड-19 से संक्रमित होने और इसके शिकार होने के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। यह मुख्य रूप से सुरक्षा गियर की कमी के कारण है। तीन दिन पहले तक 548 डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ संक्रमित हैं। इनमें आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, एएनएमए और एनएचएम कर्मचारी, स्वच्छता कार्यकर्ता, सुरक्षा गार्ड, लैब अटेंडेंट, चपरासी, कपड़े धोने और रसोई कर्मचारी जैसे कार्यकर्ता भी शामिल हैं। ड्यूटी में तैनात श्रमिकों की मृत्यु हो गई, लेकिन उन्हें कोविड-19 के लिए परीक्षण भी नहीं मिला। अधिकांश राज्यों में कार्यकर्ता 50 लाख रुपये के बीमा पैकेज के हकदार नहीं हैं और बीमा उपचार के लिए खर्च को कवर नहीं करता है।
सीटू ने मांग की है कि सभी रेड जोन में तैनात फ्रंटलाइन श्रमिकों के लिए सुरक्षा के लिए पीपीई किट मुहैया करवाने, श्रमिकों के लिए कोविड टेस्ट करवाने की सुविधा, ड्यूटी पर सभी मौतों को कवर करने वाले श्रमिकों को पचास लाख रुपये का बीमा कवर देने, कोविड-19 के दौर में ड्यूटी में लगे सभी अनुबंध और योजना श्रमिकों के लिए प्रति माह 25 हजार रुपये का अतिरिक्त प्रोत्साहन देने, संक्रमित हुए सभी लोगों के लिए न्यूनतम पांच लाख रुपये का मुआवजा, जरूरतमंदों को मुफ्त राशन और भोजन, सभी गैर आयकर देने वाले परिवारों के लिए 7500 रुपये, सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना, स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए सकल घरेलू उत्पाद का 5 प्रतिशत निजीकरण के प्रस्ताव वापस लेने, प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन, वित्तीय सहायता और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध करवाने और श्रम कानूनों के निरस्तीकरण के आदेश को वापस लेने की मांग की है।
इस मौके पर जसवीर, विपिन, ललिता, देवेंद्र, राजेश, नीलदत्त, रीकूं, संदीप, सुरेंद्र जोक्टा, सरोज, सीमा, श्यामा, रवि, विजय, विकेश, मंगत, राम दास, मंजू, रामलाल, राजकुमार सहित अन्य मजदूर मौजूद रहे।