रिकांगपिओ (किन्नौर)। कोरोना संक्रमण के चलते विश्व भर के आर्थिक जगत को खासा नुकसान हुआ है। फैक्टरी, बड़ी-बड़ी कंपनियों, ट्रांसपोर्ट सहित अन्य व्यवसायों को कोविड -19 से खासा घाटा झेलना पड़ा है, लेकिन ऐसे में सरकार ने मनरेगा कार्यों को करने की मंजूरी दी है, जिससे ग्रामीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।
लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में जहां सभी तरह के कार्य बंद हो गए थे, वहीं अब सरकार ने मनरेगा कार्य करने की हरी झंडी दे दी है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले मनरेगा मजदूरों को काफी लाभ मिल रहा है।
गौर हो कि जनजातीय जिले में कोविड-19 महामारी के दृष्टिगत 51 ग्राम पंचायतों में 5722 लाभार्थियों की ओर से 21 अप्रैल से मनरेगा कार्य शुरू किया गया है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिला किन्नौर के लिए भारत सरकार ने 7 करोड़ 91 लाख रुपये के 6,78,327 मानक दिवस अर्जित करने का लक्ष्य रखा है। किन्नौर के तीनों विकास खंडों कल्पा के लिए 82,785 लाख रुपये, निचार खंड के लिए 45,5410 लाख और विकास खंड पूह के लिए 2,48,610 लाख रुपये का बजट अनुमोदित किया गया है। इसके अलावा विकास खंड कल्पा और पूह में अतिरिक्त 50 लाख रुपये के लेबर बजट को भी अनुमोदित किया गया है। जिले की 65 पंचायतों में 596 मनेरगा कार्य स्वीकृत हुए हैं। जिले में 5722 लाभार्थी सक्रिय मजदूर का काम कर रहे हैं। भारत सरकार ने अप्रैल 2020 से मनरेगा कामगारों की दिहाड़ी प्रति दिवस 248 रुपये सुनिश्चित की है।
उप निदेशक एवं परियोजना अधिकारी, जिला ग्रामीण विकास अभिकरण किन्नौर जयवंती ठाकुर ने कहा कि मनरेगा कार्य करते वक्त सामाजिक दूरी के साथ-साथ हाथ से बनाया हुआ मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है। कोरोना महामारी के चलते 60 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्ति को काम करने की मनाही है। कोरोना महामारी के समाप्त होने पर भारत सरकार के दिशा निर्देश के अनुरूप आयु सीमा के हिसाब से कार्य पर लिए जाएंगे।