रानीकोट का ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला में नाटी करते स्थानीय लोग
महिला और पुरुषों ने डाली देव नाटी
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी(कुल्लू) कराणा पंचायत के रानीकोट में घने देवदार के जंगल में मनाए जाने वाला रानीकोट का ऐतिहासिक मेला देवता कुइंरी और पनेउई नाग के आगमन के साथ शुरू हो गया है। इस दौरान महिला और पुरुषों ने देवनाटी डाली। प्राचीन समय से मनाए जा रहे इस मेले में आज भी कई ऐतिहासिक घटनाएं देखने को मिलती हैं। घने देवदार के जंगल के मध्य रानीकोट मेले में क्षेत्र की करीब दस पंचायतों के हजारों लोग पहुंचते हैं। मान्यता है कि प्राचीन समय क्षेत्र में हिंदुओं की आराध्य गाय माता के एक भयानक बीमारी की चपेट में आने से सैकड़ों गायों की हत्या हो गई। इस भयानक बीमारी के प्रकोप से लोग चिंतित हो गए और अपने-अपने आराध्य देवता की शरण में गए। देवता ने भविष्यवाणी करते हुए जनता को आदेश दिया कि रानीकोट नामक स्थान पर एक मेले का आयोजन बीस भादों के दिन से किया जाए।
देवता के आदेश के बाद क्षेत्र के लोगों ने रानीकोट में देवदार के जंगल के मध्य मेले का आयोजन शुरू किया। कुइंरी देवता के कारदार इंद्रसिंह और पनेउई नाग क मालसिंह ने बताया कि दोनों देवताओं के आगमन के साथ इस मेले का आयोजन किया जाता है। हर साल की भांति इस वर्ष भी इस मेले में भारी जनसमूह देखने को मिला है। इस अवसर पर देवता के देवलुओं सहित क्षेत्र के सैकड़ों लोग मौजूद रहे। यह मेला दो दिन तक चलेगा।
रानीकोट का ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला में नाटी करते स्थानीय लोग
रानीकोट का ऐतिहासिक दो दिवसीय मेला में नाटी करते स्थानीय लोग