किन्नौर जिले के नेसंग में पहाड़ी से चट्टानें दरकने के कारण अवरूद्ध हुआ एनएच पांच। स्रोत : संवाद
भावानगर (किन्नौर)। किन्नौर जिले के निगुलसरी में एनएच पांच बहाली के कार्य में पहाड़ी से गिर रहे पत्थर रोड़ा बन रहे हैं। हालांकि मार्ग बहाली का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है और एनएच प्राधिकरण दोनों छोर से सड़क का निर्माण का कार्य रहा है लेकिन पहाड़ी से पत्थरों के गिरने से कार्य में बाधा उत्पन्न हो रही है।
इससे मार्ग बहाली का काम आगे बढ़ सकता है। मंगलवार को पांचवें दिन भी एनएच बहाल नहीं हो पाया है। इस कारण किन्नौर जिले के हजारों लोगों की दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। गौर हो कि बीते वीरवार को निगुलसरी में भारी भूस्खलन के कारण करीब 400 मीटर एनएच पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद से जिले की 73 पंचायतों का संपर्क पूरी तरह से कट गया है।
जिले के लोगों को आवाजाही करने में खासी परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। हालांकि बाधित स्थल से करीब एक किलोमीटर की चढ़ाई चढ़कर लोग सडक़ के दूसरी ओर पहुंच रहे है लेकिन सेब समेत अन्य फसलों को मंडियों तक पहुंचाने में खासी परेशानियां आ रही हैं। प्राधिकरण ने अब तक 400 मीटर सड़क का निर्माण कार्य पूरा कर लिया है, जबकि 100 मीटर सड़क का निर्माण करना शेष है। अब सड़क निर्माण का कार्य चट्टानें काटकर किया जा रहा है। इसमें काफी समय लग रहा है। वहीं पहाड़ी से रुक-रुककर गिर रहे पत्थरों के कारण मार्ग बहाली में समस्याएं पेश आ रही हैं। एनएच प्राधिकरण, जेएसडब्ल्यू परियोजना, पटेल इंजीनियरिंग और लोक निर्माण विभाग की 13 मशीनें और करीब 40 मजदूर बाधित एनएच को बहाल करने में जुटे हुए हैं।
प्राधिकरण ने अगले दो से तीन दिन में मार्ग बहाली का दावा किया है। एनएचएआई रामपुर के अधिशासी अभियंता केएल सुमन ने बताया कि निगुलसरी में बाधित स्थल में पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हैं। इस कारण मार्ग बहाली का कार्य प्रभावित हो रहा है। अभी तक करीब 400 मीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है, जबकि 200 मीटर सड़क का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
पैदल यात्रियों को जलपान करवा रहीं थाच गांव की महिलाएं
निगुलसरी में मार्ग बाधित होने के कारण शिमला और किन्नौर जाने वाले यात्रियों को करीब एक किलोमीटर की पहाड़़ी को पार करना पड़ रहा है। ऐसे में यात्रियों को खासी दिक्कतें झेलनी पड़ रही है। वहीं क्षेत्र के महिला मंडल थाच ने यात्रियों की सुविधा के लिए जलपान की व्यवस्था की है। इससे यात्रियों को कुछ हद तक राहत मिल रही है।