स्टाफ नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों के काम करने को मजबूर डॉक्टर
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। आयुर्वेद पद्धति से उपचार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही लाख दावे करे, लेकिन धरातल पर हालत कुछ और ही है। आयुर्वेदिक विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार के लिए ग्रामीणों को परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ स्थित एकमात्र आयुर्वेदिक चिकित्सालय में बीते लंबे समय से स्टाफ की कमी चल रही है। ऐसे में अस्पताल में तैनात डॉक्टरों को नर्स, फार्मासिस्ट और अन्य कर्मचारियों के कार्य करने पड़ रहे हैं। गौर हो कि वर्ष 2017 में किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांगपिओ में पंचकर्मा की सुविधा शुरू तो की गई, लेकिन विभाग की ओर से यहां स्टाफ की तैनाती को लेकर कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अस्पताल में जिले की 73 पंचायतों से रोजाना ग्रामीण उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को कई तरह की परेशानियों से दो-चार होना पड़ रहा है। जिला जनजातीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय रिकांगपिओ में स्वीकृत स्टाफ नर्स के तीन पद रिक्त वर्ष 2010, फार्मासिस्ट का एक पद, एएनएम दो पद रिक्त पड़े हैं। वहीं पंचकर्मा करवाने वाले महिला और पुरुष मैशर के पद वर्ष 2017 से नहीं भरे गए हैं। ऐसे में जिलेभर से अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों में खासा रोष है। स्टाफ की कमी के कारण अस्पताल में तैनात तीन डॉक्टरों को ही अस्पताल में सभी तरह के कार्य करने पड़ रहे हैं। इस कारण उनपर कार्य का बोझ बढ़ गया है। कोठी पंचायत प्रधान ओम प्रकाश नेगी, प्रधान रोघी रतन मंजरी नेगी, उपप्रधान कोठी महेश नेगी, बीडीसी सदस्य करुणा नेगी, प्रधान ख्वांगी सत्या देवी नेगी, प्रधान दुनी दीवान नेगी, प्रधान शुदारंग दलीप नेगी, प्रधान पांगी कालजंग मणी नेगी, बीडीसी सदस्य अविनाश नेगी सहित अन्य लोगों ने जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में रिक्त पड़े पदों को जल्द भरने की मांग की है।
कोट्स
अस्पताल में रिक्त पड़े पदों को लेकर विभाग और सरकार से समय-समय पर पत्राचार किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चुनाव आचार संहिता हटने के बाद अस्पताल में रिक्त स्टाफ की तैनाती होगी।
डॉ. इंदु शर्मा, जिला आयुष अधिकारी
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