देखरेख के अभाव में 40 किलोमीटर मार्ग की हालत खस्ता, एनएच बंद होने पर विकल्प के तौर पर किया जा सकता है मार्ग का इस्तेमाल
एनएच-5 के बार-बार बाधित होने से हजारों लोग परेशानियां झेलने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर में लंबे समय से नेशनल हाईवे पांच बार-बार बाधित हो रहा है। इसके चलते सेना के जवानों सहित हजारों लोग खतरे के साये में सफर करने को मजबूर हैं। ऐसे में जिले के लोगों ने शिमला जिले के सराहन के शालाबाग से वांगतू को जोड़ने वाले वाले पुराना तिब्बत मार्ग की हालत में सुधार करने की मांग उठाई है। लोगों ने बताया कि देखरेख के अभाव में करीब 40 किलोमीटर मार्ग की हालत बदतर बनी हुई है। लंबे समय से एनएच चौरा, निगुलसरी के 26 सेक्टर और नाथपा के अलावा कई संभावित स्थानों पर भारी भरकम चट्टानें गिरने से बाधित हो रहा है। इन क्षेत्रों में भूस्खलन का सिलसिला नहीं थम रहा है। ऐसे में नेशनल हाईवे पांच के वैकल्पिक मार्ग पुराना-तिब्बत से हजारों लोग और सेना के जवान लाभान्वित हो सकते है लेकिन मार्ग की दशा दयनीय
बनी हुई है। जिले के लोगों ने सरकार, प्रशासन और विभाग से समय रहते मार्ग की सुध लेने की मांग की है, जिससे सेना के जवानों सहित आम जनता को राहत मिल सके। लोगों ने बताया कि एनएच बंद होने की स्थिति में यह लोगों की आवाजाही का वैकल्पिक मार्ग हो सकता है। इससे लोगों की मुश्किलें काफी हद तक कम हो जाएंगी लेकिन इसके लिए मार्ग को दुरुस्त करने की जरूरत है। पुराना-तिब्बत मार्ग रामपुर उपमंडल के सराहन, किन्नौर जिले के शिलानी, चौरा, थाच, छोंडा, ननस्पो, तरांडा, शोल्डिंग, पौंडा, पलिंगी, सुंगरा, निचार होकर वांगतू तक जाता है। प्रधान निचार राजपाल नेगी, प्रधान चौरा विजय नेगी, प्रधान तरांडा हरि भक्त नेगी, उपप्रधान पानवी बुद्धा राम नेगी, किरण नेगी, यशवंत नेगी, हिम्मत सिंह नेगी, संजीव नेगी और सूर्याकांत नेगी सहित अन्य लोगों ने कहा कि एनएच पांच बंद होने की सूरत में इस मार्ग का उपयोग किया जा सकता है लेकिन इसके लिए सड़क की मरम्मत और निर्माण का कार्य वैज्ञानिक तरीके से किया जाना चाहिए। मार्ग से हजारों लोग, सेना और पर्यटक लाभान्वित होंगे। यहां से हर मौसम में वाहनाें की आवाजाही हो सकती है और विकल्प के तौर पर भी यह मार्ग काफी अहम है। एसडीएम भावानगर विमला वर्मा ने बताया कि लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह मांग सरकार के ध्यान में लाई जाएगी। हालांकि अभी तक किसी ने भी यह मामला प्रशासन के ध्यानार्थ नहीं लाया है। ग्रामीण अगर मांग प्रशासन के समक्ष रखेंगे तो हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।