आनी (कुल्लू)। देवता शमशरी महादेव पिछले एक माह से अपने क्षेत्र की 13 पंचायतों के दौरे पर हैं। बीते दो दिनों से खुन्न में देवता शमशरी महादेव का चार दिवसीय मेला सजा हुआ है। बीते दिन जहां लढ़ागी में देवता के साथ हुए युद्ध की झलकियां देखने को मिली। वहीं खुन्न के मेला मैदान में हजारों की संख्या में एक साथ महिला-पुरूषों की सामूहिक देवनाटी का लुत्फ उठाया। यहां देवता से जुड़ी प्राचीन और ऐतिहासिक घटनाओं की झलकें देखने को मिल रही हैं। सोमवार को मेले के तीसरे दिन देवता शमशरी महादेव रथ पर सवार होकर बाहर निकले। उनकी गद्दी पर देवता गडुमी नाग विराजमान हो गए हैं।
सोमवार शाम पांच बजे के बाद देवता शमशरी महादेव ने गद्दी को छोड़कर दी थी। गद्दी एक दिन की ढाई घड़ी के लिए देवता गडुमी को दी जाती है। जब देवता महादेव की गद्दी पर विराजमान हुए तो यह दृश्य अद्भुत था। देवता गडुमी उल्टी दिशा में दौड़ने लगे। इसे देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी। देवता के सियाने जयसिंह ठाकुर और पंचायत उपप्रधान दयाराम ठाकुर ने बताया कि खुन्न और कोहिला का यह क्षेत्र गडुमी नाग का हुआ करता था। देवता गडुमी स्वेच्छा से महादेव के साथ रहने लगे लेकिन शमशर मंदिर में गडुमी नाग सभी देवताओं के मुहरों को उनकी गद्दी से उतारकर वहां खुद बैठते थे।
उनकी ऐसी हरकतों से महादेव शमशरी ने उनको आश्वासन दिया कि जब भी खुन्न और कोहिला में उनका फेरा होगा, तो उस समय ढाई घड़ी के लिए वे अपनी गद्दी से उतरकर देवता गडुमी को सौंप देंगे। उनके ऐसा कहने से देवता गडुमी ने ऐसा करना बंद कर दिया। उस समय दिए वचन को शमशरी महादेव आज तक निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि देवता गडुमी उल्टे पैदा होने से उनका स्वभाव ही उनको उल्टी दिशा में चलने वाला बनाता है।