विशेषज्ञ की सलाह- प्रशिक्षित लोगों से करवाएं प्रूनिंग
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संवाद न्यूज एजेंसी रोहड़ू। रोहड़ू में सेब के बगीचों में काट-छांट का काम शुरू हो गया है। यह काम सर्दियों के अंत से और वसंत की शुरुआत से मार्च तक करना सबसे अच्छा होता है। इस दौरान पेड़ सुप्त अवस्था में होता है और पाला पड़ने की संभावना रहती है। सेब के पौधाें की प्रूनिंग हर वर्ष बागवानों को फल और पौधों के विकास के लिए रखरखाव का कार्य अनिवार्य रहता है। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि बागवान पत्ते गिरने के बाद इस महीने से बगीचों की प्रूनिंग का कार्य शुरू कर सकते हैं। वैसे भी हर वर्ष नवंबर के अंत और दिसंबर में पतझड़ के बाद सेब के बगीचों में हर वर्ष काट-छांट का कार्य शुरू हो जाता है। सेब के फलों की गुणवत्ता बनाए रखने और अच्छी पैदावार के लिए सेब के पौधों की काट-छांट को जरूरी माना जाता है। आजकल लगातार सूखे के कारण भले ही बागवान तौलिए बनाने और खाद मिलाने का काम नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन बगीचों में प्रूनिंग का कार्य तय समय में पूरा करना होता है। इसके बाद अधिक हिमपात से प्रूनिंग काम करने में परेशानी होती है।
बागवानी विशेषज्ञ डाॅ. नरेंद्र कायथ ने बागवानों को सलाह दी है कि सेब के बगीचों में काट-छांट का कार्य प्रशिक्षित व्यक्ति से करवाएं। काट-छांट के दौरान पौधे को सही दिशा देने के साथ अच्छी पैदावार बनाए रखने का ध्यान रखना जरूरी है। सेब के पौधे की काट-छांट का कार्य फरवरी के अंत तक पूरा होना जरूरी है। विशेषज्ञ ने बागवानों को सलाह दी है कि सेब के पौधे में कटे भाग पर साथ-साथ पेस्ट लगाएं। पौधे में कटे भाग पर लगने वाले पेस्ट की किस्म अच्छी होनी चाहिए। आधा इंच टहनियों के घाव तक पेस्ट जरूर लगाएं। यदि पौधे में समय पर पेस्ट नहीं लगता है, तो केंकर रोग की आशंका रहेगी। उन्होंने बागवानों से बगीचों में पर्याप्त नमी आने पर तौलिये बनाने और अन्य रख-रखाव के कार्य को भी समय के साथ पूरा करने की सलाह दी है।