किसानों को सिंगल क्रॉस 131 और डबल क्राॅस 105 रुपये प्रतिकिलो के हिसाब से मिलेगा बीज
विभाग ने सात अलग-अलग किस्मों का बीज मंगवाया, 20 रुपये प्रतिकिलो दिया जाएगा विशेष अनुदान
1,590 हेक्टेयर में होती है मक्की की बिजाई
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। जिला में खरीफ सीजन की मुख्य फसल मक्की की बिजाई को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। कृषि विभाग ने आगामी सीजन के लिए कमर कस ली है और किसानों को उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध करवाने के लिए निदेशालय को 318 क्विंटल बीज की मांग भेज दी है। विभाग का लक्ष्य है कि मानसून की दस्तक से पहले ही बीज की सप्लाई सुनिश्चित कर दी जाए, ताकि जिले भर में किसान समय पर बिजाई का कार्य शुरू कर सकें।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में लगभग 1,590 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि पर मक्की की बिजाई की जाती है। विशेष रूप से जिले के मैदानी क्षेत्रों, जिनमें बीबीएन बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र शामिल है, वहां मक्की की खेती बड़े स्तर पर होती है। यहां की मिट्टी और जलवायु मक्की की फसल के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। जैसे ही विभाग को बीज की खेप प्राप्त होगी, इसी माह के अंत तक बिजाई का कार्य शुरू होने की उम्मीद है। किसानों की जरूरतों और पैदावार को ध्यान में रखते हुए विभाग ने सात अलग-अलग किस्मों के बीज मंगवाए हैं। बीज की दरों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। इसमें सिंगल क्रॉस बीज इसकी कीमत 131 रुपये प्रति किलो निर्धारित की गई है, जबकि डबल क्रॉस बीज यह किसानों को 105 रुपये प्रति किलो की दर से उपलब्ध होगा। किसानों को आर्थिक राहत देने के लिए सरकार की ओर से 20 रुपये प्रति किलो का विशेष अनुदान भी दिया जाएगा। यह अनुदान सीधे तौर पर किसानों की लागत को कम करने में मददगार साबित होगा।
किसानों के लिए जरूरी सलाह
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को केवल विभाग की ओर से प्रमाणित बीजों का ही उपयोग करना चाहिए। सही किस्म का चुनाव और समय पर बिजाई न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ाती है, बल्कि कीटों के प्रकोप को भी कम करती है। बीज मिलते ही किसान अपने खेतों को तैयार कर बिजाई की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।
कोट
जिले में बिजाई के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी की जा रही हैं। बीज की मांग निदेशालय को भेज दी है। हमारा प्रयास है कि जैसे ही बीज की सप्लाई पहुंचती है, उसे तुरंत विकास खंडों और बिक्री केंद्रों के माध्यम से किसानों तक पहुंचा दिया जाए। बीबीएन जैसे मैदानी इलाकों में बिजाई का काम जल्द शुरू हो जाता है, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर वहां स्टॉक उपलब्ध करवाएंगे।
डॉ. देवराज कश्यप,उपनिदेशक,कृषि विभाग,सोलन