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रिकांगपिओ अस्पताल में 8 साल से नहीं बाल रोग विशेषज्ञ

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रिकांगपिओ (किन्नौर)। जनजातीय जिला किन्नौर के हजारों बच्चों पर कोरोना की संभावित तीसरी लहर कहीं भारी न पड़ जाए। रिकांगपिओ अस्पताल में बच्चों को बीते 8 साल से बाल रोग विशेषज्ञ की सुविधा नहीं मिल रही है जिस कारण बच्चों का स्वास्थ्य रामभरोसे चल रहा है। ऐसे में यदि कहीं जिले में तीसरी लहर कहर बरपाती है तो स्वास्थ्य विभाग इससे कैसे निपटेगा। करीब 20 हजार बच्चों को बाल रोग विशेषज्ञ की खासी दरकार है। जिले में कोरोना संक्रमण ने अब तक 172 बच्चों को अपनी चपेट में लिया है।
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गौर हो कि सरकार कोरोना वायरस से निपटने के लिए बड़े-बड़े दावे तो करती है, मगर धरातल पर कुछ नहीं दिखता है। बताया जा रहा है कि कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमण का अधिक खतरा है। ऐसे में रिकांगपिओ अस्पताल में बीते 8 वर्ष से बाल रोग विशेषज्ञ न होने से कैसे निपटा जाएगा। विशेषज्ञ के न होने से कहीं बच्चों पर कोविड की तीसरी लहर भारी न पड़ जाए। कोरोना की पहली लहर की अपेक्षा दूसरी लहर में ज्यादा मौतें हुई हैं। कोरोना वायरस के नए स्वरूप के कारण दूसरी लहर ज्यादा जानलेवा साबित हुई है। किन्नौर में कोरोना संक्रमण की चपेट में 172 बच्चे आ चुके हैं, जिनमें अभी तक 167 बच्चे कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। 5 बच्चे सक्रिय हैं।
वहीं किन्नौर कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. सूर्य बोरस ने कहा कि भाजपा सरकार की नाकामी के कारण लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोरोना काल में भी डॉक्टरों का न होना आश्चर्यजनक है। आने वाले समय में प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला जाएगा।
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उधर, उपायक्त आबिद हुसैन सादिक ने कहा कि इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव अमिताभ अवस्थी से बातचीत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जल्द ही रिकांगपिओ अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती करने की कोशिश की जाएगी।
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