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Rampur Bushahar News: खस्ताहाल सड़कें, पशु औषधालयों, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के रिक्त पदों की मार झेल रहे ग्रामीण

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सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद
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चुनावी मुद्दा : जिला परिषद वार्ड झाकड़ी की 10 पंचायतों के मरीज, स्कूली बच्चे, बागवान और पशु पालक परेशान
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खस्ताहाल सड़कों से सेब मंडी तक पहुंचाना बना जाता है चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर/डंसा। चुनाव के दौरान मतदाताओं से लुभावने वादे कर वोट तो वसूले जाते हैं, लेकिन बाद में समस्याएं जस की तस होती हैं। इस बार भी पंचायतीराज चुनाव में वार्ड की समस्याएं दूर करना प्रत्याशियों के घोषणापत्रों में हैं। शिमला के जिला परिषद वार्ड नंबर-2 झाकड़ी के तहत आने वाले क्षेत्रों के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर हैं। बात ग्रामीणों की आर्थिकी की हो, स्वास्थ्य, शिक्षा या फिर पशु पालन से जुड़ी सेवाओं की। हर तरफ अव्यवस्थाओं का आलम है। ग्रामीण खस्ताहाल सड़कों, पशु औषधालयों, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों के रिक्त पदों की मार झेल रहे हैं। जिला परिषद वार्ड नंबर -2 झाकड़ी में उपमंडल रामपुर की 10 पंचायतें आती हैं। इनमें झाकड़ी, देवठी, कूहल, डंसा, शिंगला, रचोली, धारगौरा, गोपालपुर, लालसा और सनारसा पंचायतें शामिल हैं। इन क्षेत्रों में रहने वाले अधिकांश लोगों की आर्थिकी सेब उत्पादन पर निर्भर है। क्षेत्र में हर वर्ष सेब की करीब 5 से 8 लाख पेटियों का उत्पादन होता है। क्षेत्र की अधिकतर सड़कों की हालत बेहद खराब है। खस्ताहाल सड़कों से सेब मंडी तक पहुंचाना आज भी चुनौती भरा बना हुआ है। बागवान वर्षभर कड़ी मेहनत कर सेब उत्पादन करते हैं, लेकिन जब फसल को मंडी भेजने का समय आता है, तो उनकी चिंता बढ़ जाती है। खस्ताहाल सड़कों पर वाहन चालक या तो अधिक किराया वसूलते हैं, या फिर आने से मना कर लेते हैं। क्षेत्र के हजारों लोगों को लाभान्वित करने वाली झाकड़ी-गोपालपुर, डंसा-पनोली, शांदल-बाहलीधार, रामपुर-गौरा-मशनू, पशाडा कैंची-गौरा, गोपालपुर, सुंडा-सनेई, सुंडा से लालसा, देवठी-दारनघाटी, कीम से देवठी और ऊमरी मकडोली समेत कई सड़कों की हालत खस्ता है। इसके अलावा क्षेत्र के लोग पशुपालन पर भी काफी हद तक निर्भर हैं। क्षेत्र के अधिकांश पशु औषधालयों में स्टाफ की कमी के कारण पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिल पाता है। इस कारण पशु पालकों में खासी नाराजगी है। यही हाल स्कूलों और स्वास्थ्य संस्थानों का भी है। अधिकतर स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं, स्वास्थ्य केंद्र देवठी, धारगौरा, सनारसा, दारन सहित आयुर्वेदिक विभाग के कई स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की कमी है। इससे मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ता है।
धार्मिक पर्यटन स्थल श्राईकोटी के लिए छह माह से ठप पड़ी बस सेवा
क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल श्राईकोटी के लिए भी 6 महीने से बस सेवा ठप पड़ी है। इस कारण हजारों श्रद्धालु मंदिर पहुंचने में परेशानी झेल रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं के न होने से ग्रामीणों में खासी नाराजगी है। इस बार के चुनाव में भी ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाता सुविधाओं में सुधार की आस लगाए हुए हैं।
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क्या कहते हैं मतदाता
क्षेत्र के अजय अष्टू का कहना है कि जिला परिषद वार्ड के तहत आने वाली अधिकतर सड़कें खस्ता हालत में हैं। खस्ताहाल सड़कों पर किसानों-बागवानों और पशु पालकों को अपने उत्पाद मंडियों तक पहुंचाने में खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदा से भी हर साल बागवानों को खासी क्षति पहुंच रही है। रामपुर से श्राईकोटी जाने वाली बस 6 माह से मझाली से आगे नहीं जा रही।
पशुपालक विकास डमालू का कहना है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में हजारों पशुपालकों की मांग पर पशु औषधालय डंसा का दर्जा बढ़ाने की अधिसूचना और पांच पदों की स्वीकृति मिली थी। सत्ता परिवर्तन के बाद जारी आदेश निरस्त हो गए। क्षेत्र के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में पशुपालक आज भी पशुओं की बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं।
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प्यारे लाल का कहना है कि अधिकांश ग्रामीण सड़कें बदहाल हैं। क्षेत्र के स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र ग्रामीणों के लिए शोपीस बनते जा रहे हैं। मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीण इलाकों के स्कूली बच्चे और मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद

सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद

सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद

सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद

सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद

सुंडा-सनेई सडक़ की खस्ताहालत से जूझ रहे ग्रामीण। संवाद

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