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Rampur Bushahar News: बागवानों को नहीं मिलीं दवाइयां और सब्सिडी, भाजपा ने किया प्रदर्शन

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टिक्कर में भाजपा का प्रदर्शन, चेतन बरागटा ने सरकार को घेराटिक्कर में भाजपा का प्रदर्शन, चेतन बर
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टिक्कर में यूनिवर्सल कार्टन में सेब की मात्रा पर उठाए सवाल
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संवाद न्यूज एजेंसी

रोहड़ू । भाजपा संयुक्त मोर्चा ने शुक्रवार को टिक्कर में प्रदर्शन कर कांग्रेस सरकार पर बागवानों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता चेतन सिंह बरागटा ने कहा कि सेब बहुल क्षेत्रों के मंत्री और विधायक बागवानों की समस्याओं को न तो विधानसभा में प्रमुखता से उठा रहे हैं और न ही कैबिनेट में इन पर गंभीरता से चर्चा हो रही है। केंद्र सरकार के समक्ष भी बागवानों के मुद्दों को प्रभावी ढंग से नहीं उठाया जा रहा है। चेतन बरागटा ने कहा कि उद्यान केंद्रों में बागवानों को स्प्रे की दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही हैं और बागवानी में इस्तेमाल होने वाली सामग्री पर पर्याप्त सब्सिडी भी नहीं मिल रही है। सरकार के बार-बार बदलते निर्देशों से बागवान परेशान हैं। उन्होंने जमीन के दस्तावेज मांगने, सेब की बोरियों के विवरण को लेकर नोटिस जारी करने और मंडियों में बिक्री व्यवस्था को लेकर बनी अनिश्चितता पर भी सवाल उठाए। इस अवसर पर भाजपा जिला अध्यक्ष अरुण फाल्टा ने कहा कि सेब बागवानी हिमाचल की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और इससे लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी है। सरकार को बागवानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने बागवानों को आवश्यक दवाइयां उपलब्ध करवाने, सब्सिडी सुनिश्चित करने और मंडियों की व्यवस्था सरल व पारदर्शी बनाने की मांग की। प्रदर्शन में किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष गोपाल जबैईक, सतीश लेटका, अनित परेट, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष संदीप रोलटा, चेतन कडेईक, रवि पनैईक सहित भाजपा के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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यूनिवर्सल कार्टन तो लाए, लेकिन इसमें कितना सेब आ रहा है, यह सोचने का विषय : चेतन बरागटा

टिक्कर। भाजपा नेता चेतन सिंह बरागटा ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने यूनिवर्सल कार्टन तो लागू कर दिया, लेकिन इसमें कितनी मात्रा में सेब आ रहा है, इस पर विचार नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सल कार्टन की अवधारणा पूर्व बागवानी मंत्री की थी, लेकिन इसे लागू करते समय यूनिवर्सल ट्रे की व्यवस्था भी की जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की मंडियों में सेब की बिक्री कभी दर के आधार पर तो कभी वजन के आधार पर होने को लेकर असमंजस बना रहता है। इससे बागवानों को परेशानी उठानी पड़ रही है और वे दूसरे राज्यों की मंडियों में सेब बेचने के लिए आकर्षित हो रहे हैं। इससे प्रदेश को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को बागवानों की समस्याओं को समझते हुए बिक्री व्यवस्था में स्पष्टता लानी चाहिए।
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