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मंदिरों के पुरातन स्वरूप की वास्तुशैली को बचाकर रखना हमारी सामूहिक जिम्मेवारी : डॉ. पंकज ललित

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संवाद न्यूज एजेंसी
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रोहड़ू। भाषा एवं संस्कृति विभाग ने धार्मिक संस्थानों, पुरातन स्मारकों और पुराने स्थलों के लिए सहायता अनुदान योजना-12 पर आधारित खंड विकास अधिकारी कार्यालय रोहड़ू के सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. पंकज ललित निदेशक भाषा एवं संस्कृति विभाग ने की । कार्यशाला का संचालन जिला भाषा अधिकारी शिमला अनिल हारटा ने किया। इस अवसर पर राज्य संग्रहालय के अध्यक्ष डाॅ. हरी चौहान ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि मंदिरों के पुरातन स्वरूप की वास्तुशैली को भावी पीढ़ी के लिए बचा कर रखने और उसके जीर्णोद्धार करने की हर व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस अवसर पर मंदिर आर्किटेक्ट स्वप्निल भोले ने रोहड़ू और छोहारा क्षेत्र के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न मंदिर वास्तुशिल्प के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मंदिर के नक्काशी किए हुए लकड़ी के पैनल, खंडित मूर्तियों को प्रवाहित और नष्ट करने की बजाय राज्य संग्रहालय शिमला को प्रदर्शन के लिए स्वेच्छा से भेंट करने का आग्रह किया, ताकि इस विरासत को भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित किया जा सके।
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डाॅ. पंकज ललित ललित ने धार्मिक संस्थानों, मंदिरों के वास्तुशिल्प को बचाए रखने के लिए इसकी विशेषताओं मे बताया कि काठ कुनि शैली में बने मंदिर भूकंपरोधी होते हैं। इस शैली के मंदिर पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और पर्यटन को बढ़ावा देने में सहायक है। उन्होंने मंदिर समितियों के उपस्थिति सदस्यों से इसमें सामुदायिक सहयोग के माध्यम से प्रलेखन, पुराने स्वरूप और नक्शा आदि को काष्ठ कला के माध्यम से मंदिर भवन में उकेरने तथा भावी पीढ़ी को उसके मूल स्वरूप को बनवाने की अपील की। कार्यशाला में रोहड़ू व छोहारा विकास खंडा के पंचायतों के प्रधान, 50 से अधिक मंदिर समितियों के पदाधिकारी, कारदार, पंजीकृत समितियों के प्रधान और सचिव उपस्थिति रहे। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी हितेंद्र शर्मा, दोनों विकास खंडों के कनिष्ठ अभियंता रामेश्वर सिंह, सतीश कुमार, राजीव डोगरा और भाषा संस्कृति विभाग के अधिकारी विकास वनियाल, प्रारूपकार अतुल पल्हनिया, शिवम ठाकुर, राजेंद्र चौहान और गोपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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