रिकांगपिओ (किन्नौर)। उत्तराखंड में हुई त्रासदी के बाद जिला किन्नौर प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रशासन ग्लेशियर टूटने और बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए मॉकड्रिल करेगा। जनजातीय जिला किनौर में सतलुज नदी में अब तक दो बार बाढ़ आने से करोड़ों की संपत्ति और मवेशियों को नुकसान पहुंचा है। जिले में 31 जुलाई 2000 को रात में बाढ़ आने से करोड़ों रुपये की संपत्ति और मवेशियों के साथ कई लोग लापता हो गए थे। इस दौरान कई मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। वहीं, बाढ़ का मंजर एक बार फिर 26 जून 2005 को पारछू झील से आई बाढ़ के कारण देखने को मिला था। इसमें भी करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था।
जिले में बर्फबारी के बाद ग्लेशियरों के गिरने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में ग्लेशियरों के गिरने से बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए जिला प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद हो गया है। प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार आगामी आने वाले दिनों में जिला किन्नौर प्रशासन इस प्रकार की आपदा से निपटने के लिए मॉकड्रिल करेगा।
उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए तत्पर रहें। किसी भी आपदा से निपटने के लिए मॉकड्रिल का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने जिले के लोगों से अपील की है कि नदी-नालों का जलस्तर कभी भी बढ़ सकता है, इसलिए उनके नजदीक न जाएं।