देवीधार में शांद यज्ञ के लिए चलेंगी स्पेशल बसें
29 साल बाद होने वाले शांद यज्ञ में हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना
अमर उजाला ब्यूरो
रोहडू। रणसार घाटी में रनोल गांव के देवता खंटू महाराज के मंदिर में 29 साल बाद होने वाली शांद में परिवहन निगम की चार स्पेशल बसें तीन दिन लगातार चलती रहेंगी। इस दौरान आयोजन स्थल तक छोटे वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। शांत महायज्ञ को लेकर उपमंडल प्रशासन के साथ मंदिर कमेटी ने सभी तैयारियों पूरी कर ली हैं।
रनोल शांद महायज्ञ में 7 से 9 जनवरी तक हजारों की संख्या में लोगों के मौजूद रहने की संभावनाओं के चलते यातायात और कानून व्यवस्था को चाक चौबंद करने की दृष्टि को लेकर स्थानीय मंदिर कमेटी ने फैसला लिया है कि इस दौरान देवीधार से रनोल तक निजी वाहनों की आवाजाही पर पूरा प्रतिबंध रहेेगा। तीन दिन तक परिवहन निगम की चार विशेष बसों की व्यवस्था की गई है। चारों बसें तीन दिन लगातार बडियारा से देवीधार खड्ड होकर रनोल तक लगातार चलेंगी। आरएम रोहडू विनोद शर्मा ने बताया कि परिवहन निगम की ओर से लोगों की सुविधा को लेकर पुख्ता व्यवस्था की गई है। निगम इन चार बसों के अलावा और बसों को भी लगाने को लेकर तैयार है।
प्रभारी पुलिस थाना चिड़गांव अश्वनी कुमार ने बताया कि किसी अनुष्ठान में लोगों की अधिक संख्या में इकट्ठा होने से जाम की स्थिति को रोकने के लिए छोटे वाहनों के प्रवेश को रोक दिया गया है। इस दौरान अगर कोई निजी वाहन बडियारा से रनोल तक खड़ा दिखा तो उसको उठाने के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई है। डीएसपी रोहडू सुनील नेगी ने लोगों से आग्रह किया है कि सभी पुलिस व्यवस्था में सहयोग करें। इस दौरान बडियारा में पुलिस का नाका रहेगा। महायज्ञ मे ट्रैफिक और कानून व्यवस्था को लेकर पुलिस के दर्जनों जवान तैनात रहेंगे। प्रशासन की ओर से इस दौरान एंबुलेंस ,फायर और मंदिर कमेटी के कार्यक्रम में लगे विशेष वाहनों को पास जारी किया जाएगा।
मंदिर कमेटी खंटू महाराज रनोल के कायथ बलदेव सिंगटीयाण ने बताया कि इस कार्यक्रम के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और शिमला ग्रामीण के विधायक विक्रमादित्य सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर रहे हैं। समारोह में रोहडू के विधायक मोहन लाल ब्राक्टा विशिष्ट मेहमान के तौर पर मौजूद रहेंगे। इस महायज्ञ में क्षेत्र के 8 खूदों में ोहल, जाबल, पुजारली, थली, देवीधार के देवता सहित धगोली, नडला, टोडसा के परशुराम महाराज व चार स्थानीय महासु देवता मौजूद हो रहे हैं।