हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में मानसून का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार तड़के चोलिंग क्षेत्र में बादल फटने की घटना ने शिमला-किन्नौर राष्ट्रीय राजमार्ग-5 पर भारी मात्रा में मलबा ला दिया, जिससे यातायात घंटों तक बाधित रहा। इस घटना में एक पिकअप और एक स्कॉर्पियो वाहन मलबे में दब गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों वाहनों में सवार लोग सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहे और किसी भी जानमाल की हानि नहीं हुई।
राजमार्ग पर यातायात बाधित, आठ घंटे बाद बहाली: यह घटना शुक्रवार सुबह लगभग चार बजे हुई। राजमार्ग पर मलबा आने के कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे यातायात करीब आठ घंटे तक प्रभावित रहा। सूचना मिलते ही प्रशासन और मशीनरी हरकत में आई और मलबा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया गया। सुबह करीब 10:30 बजे यातायात को पुनः सुचारू किया जा सका।
ओठंग नाले में बाढ़, संपर्क सड़कें क्षतिग्रस्त: एक अन्य घटना में, रिब्बा क्षेत्र के ओठंग नाले में तड़के करीब तीन बजे अचानक बाढ़ आ गई। बाढ़ के तेज बहाव के कारण रिब्बा-कंडे संपर्क सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई। कई वाहन मलबे में टायर तक दब गए और आसपास के रास्तों पर मोटी मलबे की परत जम गई। पानी की तेज आवाज सुनकर ग्रामीण दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए।
पिछले दो दिनों में प्राकृतिक आपदाओं का सिलसिला जारी: किन्नौर में पिछले दो दिनों से लगातार प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं सामने आ रही हैं। इससे पहले भावा वैली की शांगो खड्ड में बादल फटने से एक पैदल पुल बह गया था। लिप्पा गांव में पेजर खड्ड में आई बाढ़ से सिंचाई व्यवस्था और संपर्क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुए थे। इसके अलावा, रिस्पा गांव के पास होल्डो नाले में जलस्तर बढ़ने से एक अस्थायी रास्ता भी बह गया था।
एनएचएआई को लाखों का नुकसान: राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अनुसार, मानसून के दौरान अब तक विभाग को करीब 20 लाख रुपये का नुकसान हो चुका है। यह घटनाक्रम जिले में मानसून के गंभीर प्रभाव को दर्शाता है और भविष्य में और अधिक क्षति की आशंका को बढ़ाता है। प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य जारी रखे हुए है।