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काशापाट स्कूल में शिक्षकों का टोटा, सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर

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संवाद न्यूज एजेंसी
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रामपुर बुशहर। प्रदेश सरकार के ग्रामीण क्षेत्रों में घर-द्वार पर बेहतर शिक्षा मुहैया करवाने के दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं। रामपुर उपमंडल के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला काशापाट में बीते लंबे समय से शिक्षकों का टोटा चल रहा है, जिसके चलते 35 छात्र दूर-दराज के अन्य स्कूलों की ओर पलायन कर चुके हैं और अन्य विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है।
केवल प्रधानाचार्य और एक एसएमसी हिंदी प्रवक्ता के सहारे वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल चल रहा है। यहां अध्यापकों के छह पद खाली हैं। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में किस तरह शिक्षा मुहैया करवाई जा रही है। विद्यार्थियों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है।
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सरकार और शिक्षा विभाग की अनदेखी ग्रामीणों पर भारी पड़ रही है। क्षेत्र के लोगों में सरकार की कार्य प्रणाली को लेकर भारी रोष है। पंचायत प्रधान पुष्पा सनाटू, एसएमसी प्रधान फूला सिंह, उपप्रधान पन्ना लाल, बीडीसी सदस्य सरोजनी, ईश्वर, राकेश, रोशनी देवी और राज कुमारी सहित कई अन्य लोगों ने कहा कि स्टाफ की समस्या का मुद्दा सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष कई बार उठाया जा चुका है।
कहा कि मुख्यमंत्री से भी रिक्त पदों को भरने को लेकर शिमला में प्रतिनिधिमंडल मिला था। बावजूद इसके समस्या जस की तस बनी हुई है। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। शिक्षकों के अभाव में गरीब तबके के अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पाठशाला में अध्ययनरत बच्चों का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि स्कूल में शिक्षकों की कमी के कारण हाल ही में ग्यारहवीं कक्षा से 20 और बारहवीं कक्षा के 15 विद्यार्थी दूसरे स्कूलों को पलायन करने को मजबूर हुए हैं। गरीब तबके के अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सता रही है। उन्होंने चेताया कि जल्द शिक्षकों के पद नहीं भरे गए तो सड़क पर उतर कर आंदोलन किया जाएगा।
उधर, वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला काशापाट की प्रधानाचार्या माया साहनी ने कहा कि शिक्षकों के रिक्त पदों का मामला सरकार और शिक्षा विभाग को भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द रिक्त पदों को भरा जाएगा।
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36 छात्रों पर एक ड्राइंग शिक्षक
वहीं माध्यमिक पाठशाला पाट में भी शिक्षकों की कमी की मार अभिभावकों पर पड़ रही है। एकमात्र ड्राइंग शिक्षक के हवाले करीब करीब 36 विद्यार्थियों के भविष्य का जिम्मा है। यहां शिक्षकों के चार पद खाली हैं।
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