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Rampur Bushahar News: श्याम रंग से रंगा युला कंडा, झील के बीच सजा कान्हा का दरबार

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किन्नौर के युला कंडे स्थित मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन को लगी कतारें। संवाद
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विश्व के सबसे ऊंचे कृष्ण मंदिर में मनाया जन्माष्टमी पर्व
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जिले सहित प्रदेश के विभिन्न इलाकों से श्रीकृष्ण दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु
प्रशासन और भागवैन मंदिर समिति ने धूमधाम से मनाया जिला स्तरीय पर्व
मुख्य अतिथि नायब तहसीलदार इंद्र सिंह खोशटों ने पर्व का आगाज
संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)।
जन्माष्टमी के अवसर पर युला कंडा श्याम रंग से रंग गया। यहां प्राकृतिक झील के बीच कान्हा का दरबार सजा। शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रीकृष्ण के दर्शन के बाद झील में टोपी बहाकर लोगों ने अपना फलादेश भी जाना। युला कंडे में प्रशासन और भागवैन मंदिर कमेटी ने जिला स्तरीय जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से मनाया। जन्माष्टमी से एक रोज पूर्व ही प्रशासन, मंदिर समिति और युला के ग्रामीण यहां पहुंच गए थे। सुबह से ही प्राकृतिक झील के बीच स्थित भगवान श्रीकृष्ण के मंदिर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गईं। जन्माष्टमी पर्व से पूर्व वीरवार को युला के ग्रामीणों, बौद्ध लामाओं और श्रद्धालुओं ने युला कंडे के लिए यात्रा शुरू की। लोकगीतों और बौद्ध मंत्रों के साथ करीब 12 किलोमीटर की यात्रा कर शाम को सभी सराय भवन पहुंचे। यहां रातभर भजन-कीर्तन का दौर चला। सुबह प्रसाद तैयार कर श्रद्धालु श्रीकृष्ण मंदिर पहुंचे। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करने के बाद परंपरा के अनुसार पशुओं को नमक खिलाया गया। जिला स्तरीय जन्माष्टमी पर्व का शुभारंभ नायब तहसीलदार टापरी इंद्र सिंह खोशटों ने किया। जिले के कल्पा, पूह और निचार खंड के अलावा रामपुर, शिमला और प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु युला कंडे पहुंचे। भागवैन मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रमेश शुवाल, उपाध्यक्ष प्रदीप शुवाल, सचिव गुलशन नेगी, कोषाध्यक्ष वीरेंद्र लाटंगच और वरिष्ठ सलाहकार सुरेश शुवाल ने कहा कि इस वर्ष भी युला कंडे में जन्माष्टमी पर्व धूमधाम से आयोजित हुआ। हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां कृष्ण दर्शन के लिए पहुंचे। जिला स्तरीय पर्व के दौरान नाटियों का भी खूब दौर चला।
पांडवों ने बनवाया था मंदिर
युला गांव से करीब 12 किलोमीटर ऊपर 12,778 फीट की ऊंचाई पर युला कंडा में श्रीकृष्ण का यह मंदिर प्राकृतिक झील के बीच बना हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण के प्रति क्षेत्र के लोगों में गहरी आस्था है और हर वर्ष यहां हजारों की संख्या में कृष्ण भक्त पहुंचते हैं। मान्यता है कि पवित्र झील में मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों ने वनवास के दौरान किया था।
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यह है मान्यता
जन्माष्टमी के दिन युला कंडा में बनी प्राकृतिक झील के साथ बहती नहरों में लोगों ने टोपी डालकर अपना फलादेश जानते हैं। मान्यता है कि यदि टोपी नहर में बहते हुए दूसरे स्थान पर बिना डूबे पहुंच जाए तो भाग्य अच्छा माना जाता है। वहीं, यदि टोपी नहर में डूब जाए तो इसे भविष्य के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता।

किन्नौर के युला कंडे स्थित मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन को लगी कतारें। संवाद

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