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ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा के रास्ते का रोड़ा बन रही इंटरनेट स्पीड

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आनी (कुल्लू)। जहां देश-दुनिया कोरोना महामारी से जूझ रही है, वहीं भारत में अध्ययनरत छात्रों पर इसका ज्यादा असर पड़ा है। स्कूल बंद होने से बच्चों को मानसिक तौर पर भारी परेशानी हो रही है। बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई के फरमान जारी कर रखे हैं।
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आनी के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में ऑनलाइन शिक्षा पर भी संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। कहीं, बच्चों के पास मोबाइल और लैपटॉप नहीं हैं तो कहीं स्मार्टफोन हैं तो वे इंटरनेट की स्पीड न होने से शोपीस साबित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षकों को व्हाट्सएप मैसेज या टेक्सट मैसेज के जरिये ही काम चलाना पड़ रहा है। इंटरनेट की इतनी स्पीड नहीं है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये शिक्षा दी जा सके। कई जगह नेट स्पीड कुछ ठीक रहती है तो वहां वीडियो कॉल बीच-बीच में ड्रॉप हो जाती है। इससे इन दिनों बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आनी के कुंगश स्कूल की दसवीं कक्षा की छात्रा महक शर्मा का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई इंटरनेट की स्लो स्पीड के चलते नहीं हो पा रही है। उन्होंने मोबाइल कंपनियों और सरकार से मांग उठाई है कि उन्हें पढ़ाई के अनुकूल नेट स्पीड मुहैया करवाई जाए। इसके बारे में सरस्वती विद्या मंदिर कुंगश के प्रधानाचार्य संजय कुमार का कहना है कि उनके अधिकतर छात्रों के पास स्मार्टफोन हैं लेकिन इंटरनेट की बहुत धीमी स्पीड के चलते कई जगहों पर बच्चों को पढ़ाने में दिक्कत हो रही है। कोरोना के चलते बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत इंटरनेट का होना अनिवार्य है। उन्होंने सरकार और मोबाइल कंपनियों से इंटरनेट की गति को मजबूत करने की मांग उठाई है।
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