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Rampur Bushahar News: लवी मेले में राज्य स्तरीय से साथ पंजाबी और बॉलीवुड कलाकारों को भी बुलाने के निर्देश

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दो वर्ष से प्रदेश के कलाकार ही दे रहे सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
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मेले की व्यापारिक गतिविधियां पीजी कॉलेज मैदान में होंगी

सुभाष सेन
रामपुर बुशहर। रामपुर का अंतरराष्ट्रीय लवी मेला लंबा इतिहास समेटे हुए है। मेले में बीते दो वर्ष से राज्य स्तर के कलाकार ही भाग ले रहे हैं। बीते दो वर्षों को छोड़ें, तो इससे पहले पंजाबी और बॉलीवुड के कलाकार भी आते रहे हैं। इस बार लवी मेला कमेटी के सदस्यों को जिला प्रशासन ने पंजाबी और बॉलीवुड के बड़े स्तर के कलाकारों को बुलाने के भी निर्देश दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय लवी मेला 11 से 14 नवंबर तक रामपुर में सजेगा। मेले की व्यापारिक गतिविधियां जहां पीजी कॉलेज मैदान में आयोजित होंगी, वहीं चार दिन तक सांस्कृतिक संध्याएं पदम स्कूल रामपुर में सजेंगी। बीते दो वर्ष से मेले में केवल राज्य स्तरीय कलाकारों को ही बुलाया जा रहा है। इस पर मेला कमेटी के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि पूर्व के वर्षों में इस मेले में अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के कलाकार भाग लेते रहे हैं, लेकिन बीते दो वर्षों से मेले में राज्य स्तर के कलाकार ही प्रस्तुतियां दे रहे हैं। हालांकि, क्षेत्र के लोग खासकर युवा बॉलीवुड या फिर पंजाबी गायकों को सुनना चाहते हैं। नगर परिषद रामपुर के अध्यक्ष करण शर्मा ने मेले को लेकर आयोजित बैठक में कहा कि लवी मेले में 2024 से पूर्व जो भी सांस्कृतिक संध्याएं हुई हैं, उनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और पंजाबी गायकों को बुलाया जाता था। दो वर्ष से मेले में बाहर का कोई कलाकार नहीं पहुंच रहा। इस संबंध में मेला कमेटी संज्ञान लेने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोग बड़े कलाकारों को सुनना चाहते हैं, तो इस वर्ष मेले में बड़े कलाकार को बुलाया जाना चाहिए। उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि 2024 में समेज त्रासदी के कारण राज्य स्तरीय कलाकारों को ही बुलाया गया। इस वर्ष बड़े कलाकारों को बुलाने का प्रयास किया जाएगा। बताते चलें कि वर्ष 2022 में बॉलीवुड गायक मोहम्मद इरफान, वर्ष 2023 में पार्श्व गायक साज भट्ट, इंडियन आइडल फेम सलमान अली ने दर्शकों का मनोरंजन किया, जबकि इसके बाद के वर्षों में प्रदेश के कलाकार ही मेले में प्रस्तुतियां दे रहे हैं।
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मेले के आयोजन के बारे में अलग-अलग सुझाव आए हैं। स्थानीय, हिमाचली कलाकारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों को बुलाए जाने पर चर्चा हुई है। सदस्यों का कहना है कि सांस्कृतिक संध्याओं का मिला जुला स्वरूप होना चाहिए। लोग पंजाबी और पार्श्व गायकों को सुनना चाहते हैं। कलाकारों को बुलाने पर अंतिम फैसला कल्चरल कमेटी लेगी। स्थानीय वाद्ययंत्रों, सांस्कृतिक गतिविधियों की भी प्रतियोगिताएं करवाई जाएंगी। मेले से संबंधित जो सुझाव आएंगे, तो उसपर भी उचित निर्णय लिया जाएगा।
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-अनुपम कश्यप, उपायुक्त शिमला
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