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Rampur Bushahar News: कम फसल पर महंगाई की मार, सेब पैकिंग सामग्री के बढ़े दाम से बागवान परेशान

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पेटियां में सेब को पैकिंग करते बागवान। संवाद
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अभियान-4 : पिछले वर्ष 52 रुपये में मिलने वाली गत्ते की पेटी इस बार 55 से 58 रुपये तक बिक रही
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. सेपरेटर और अन्य पैकिंग सामग्री के दाम में भी प्रति बंडल 30 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू।
जिला के सेब उत्पादक क्षेत्रों में इस वर्ष कम फसल के बीच पैकिंग सामग्री की बढ़ती कीमतों ने बागवानों की चिंता बढ़ा दी है। गत्ते की पेटियों (कार्टन) , सेपरेटर और अन्य सामग्री के दामों में वृद्धि से सेब उत्पादकों की लागत काफी बढ़ गई है। पिछले वर्ष 52 रुपये में मिलने वाली गत्ते की पेटी इस बार 55 से 58 रुपये तक बिक रही है। इसी तरह सेपरेटर और अन्य पैकिंग सामग्री के दामों में भी प्रति बंडल 30 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बागवानों का कहना है कि ओलावृष्टि और मौसम की मार से पहले ही उत्पादन प्रभावित हुआ है। कम उत्पादन के कारण उनकी आय पर असर पड़ा है। अब पैकिंग सामग्री महंगी होने से उनकी आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है। दुकानदारों ने डीजल, तेल, कागज और अन्य कच्चे माल की कीमतें बढ़ने को इसका कारण बताया है। हालांकि, बागवानों का आरोप है कि इसका पूरा बोझ उन पर डाला जा रहा है। वे इसे सरकार की बाजार पर कमजोर पकड़ का परिणाम मानते हैं। बागवानों ने सरकार से सेब पैकिंग सामग्री की कीमतों की निगरानी के लिए प्रभावी तंत्र बनाने की मांग की है। उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की तरह मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है। बढ़ती लागत से राहत देने के लिए विशेष सहायता पैकेज की भी मांग की गई है। बागवानों का कहना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम होंगे। यह प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालेगा।

बागवान बोले

बागवान सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि इस बार पहले ही फसल सामान्य से काफी कम है। ऐसे समय में पैकिंग सामग्री महंगी होने से हमारी लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने सरकार से सेब उत्पादकों को राहत देने के लिए पैकिंग सामग्री के दामों पर नियंत्रण की व्यवस्था करने की मांग की।
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बागवान मोहन सिंह ने कहा कि खुले बाजार में मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। बागवान मजबूरी में महंगी दरों पर सामग्री खरीदने को विवश हैं। उनका आरोप है कि सरकार की निगरानी कमजोर होने से व्यापारी अपनी सुविधानुसार कीमतें तय कर रहे हैं।
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छोटे बागवानों के लिए चुनौती

बागवान विनोद चौहान ने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति रही तो छोटे और मध्यम वर्ग के बागवानों के लिए सेब उत्पादन आर्थिक रूप से चुनौती बन जाएगा। यह उनके लिए अपनी आजीविका चलाना मुश्किल कर देगा। बागवानों ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा है। सेब बागवानी को प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

पेटियां में सेब को पैकिंग करते बागवान। संवाद

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