रोहड़ू। सेब के बगीचों में फल लगने के बाद फल छेदक सुंडी का खतरा हो गया है। तापमान बढ़ने पर सेब के बगीचों में फल छेदक सुंडी हर साल फसल को भारी नुकसान पहुंचाती है। बागवानी विशेषज्ञों की सलाह है कि कम ऊंचाई वाले सेब के बगीचों में फल छेदक सुंडी की हर दिन जांच करते रहें।
फलों को नुकसान नजर आए तो रोकथाम के लिए दवाइयों के छिड़काव के लिए तैयार रहें। सेब के बगीचों में अप्रैल और मई में गहरे हरे रंग की सुंडी फलों को छेद कर फसल को भारी नुकसान पहुंचाती है। फल का विकास होने के साथ सुंडी गुच्छे में फलों को अधिक नुकसान पहुंचाती है।
निचले एवं मध्यम ऊंचाई के बगीचों में सुंडी का हमला अप्रैल से ही शुरू हो जाता है। बागवानों ने फल छेदक सुंडी का प्रकोप रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह के बाद रोकथाम की तैयारी शुरू कर दी है।
वर्ष 2010 में सुंडी के प्रकोप से पहली बार सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ था। बागवानों की परेशानी बढ़ने के बाद विशेषज्ञों की टीम ने बगीचों का दौरा किया।
कई बार इसका जब तक पता चलता बागवानों को फसल को भारी नुकसान हो जाता है। इस साल निचले क्षेत्र में फल छेदक सुंडी बगीचों में नजर आने लगी है।
बागवानी विशेषज्ञ एवं पूर्व बागवानी विकास अधिकारी डाॅ. आग्रदास का कहना है कि पहली बार फ्रूट बोरर की जांच के दौरान 2010 सामने आया कि रात के समय पतंगे, कीट सेब के पौधे में फलों के गुच्छों के बीच अंडे छोड़ते हैं। गर्मी बढ़ने पर सप्ताह में अंडे विकसित होकर सुंडी का रूप धारण कर फलों को नुकसान पहुंचाते है।
सुंडी कच्चे फल को अधिक नुकसान करती है। जब फल का छिल्का मोटा होने लगे तो उसमें कम नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि बागवान हर दिन बगीचों में इसकी जांच करें। यदि बगीचे में फ्रूट बोरर का प्रकोप मिले तो दवाइयों का छिड़काव करें। गलत दवाई के छिड़काव से फसल और पौधों को नुकसान की आशंका रहती है।