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सरसों तेल के दाम बढ़ने से आम आदमी पर बढ़ा आर्थिक बोझ

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रामपुर बुशहर। किसान सभा निरमंड ने प्रदेश सरकार को कोरोना महामारी के आपदा के दौर में अवसर तलाशने वाली सरकार करार दिया है। सभा ने सरसों के तेल के दामों में की गई वृद्धि और शराब की कीमत घटाने वाली नीति की कड़े शब्दों में निंदा की है।
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किसान सभा जिला महासचिव देवकी नंद, निरमंड ब्लॉक अध्यक्ष पूर्ण ठाकुर और सचिव जगदीश ने कहा कि प्रदेश मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए फैसले से इस बात का खुलासा हो गया है कि सरकार आम जनता के प्रति कितनी संवेदनशील है। नई आबकारी नीति के तहत अब प्रदेश में शराब सस्ती होगी और भूख मिटाने और जिंदा रहने के लिए सस्ता राशन अब मंहगा होगा। डिपुओं में मिलने वाले सरसों के तेल के दाम में 57 रुपये की बढ़ोतरी कर आम जनता पर आर्थिक बोझ पड़ा है। संकट के इस समय में सस्ता राशन मुहैया किया जाना चाहिए था, लेकिन सरकार आपदाकाल में भी अपने लिए अवसर तलाश रही है। सरकार का यह फैसला जनविरोधी है। कोरोना महामारी की मार झेल रहे लाखों लोगों का रोजगार छिन गया है, मनरेगा में रोजगार नहीं मिल रहा है और ऐसे में सरकार द्वारा तेल के दाम बढ़ाकर जनता से खुली लूट जैसा काम किया जा रहा है।
किसान सभा ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि महामारी के दौर में प्रत्येक व्यक्ति को 6 माह का राशन उपलब्ध करवाया जाए, बेरोजगार हुए लोगों को 7500 रुपये प्रति माह दिया जाए। मनरेगा में 120 दिन का रोजगार देना सुनिश्चित किया जाए और ओलावृष्टि, तूफान से हुए नुकसान का मुआवजा किसानों और बागवानों को दिया जाए। उन्होंने चेताया कि यदि जल्द ही सरकार इन सभी मांगों को लेकर उचित कदम नहीं उठाती तो सभा आने वाले दिनों उग्र आंदोलन करेगी।
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