संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी के ऐतिहासिक ठाकुर मुरलीधर मंदिर बटाला में होली के त्योहार को अनोखे अंदाज में मनाने की परंपरा है। इसे देखने के लिए दूरदराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस मंदिर में होली का उत्सव एक दिन पूर्व से ही प्रारंभ हो जाता है। इसमें भक्त भगवान श्रीकृष्ण के साथ होली खेलते हैं। होली के प्रथम दिन मंदिर में रात्रि 9:00 बजे से लेकर 12:00 बजे तक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस दौरान श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित नृत्य और भजन प्रस्तुत करते हैं। उसके बाद ब्रह्ममुहूर्त तक महिला और पुरुष मिलकर पारंपरिक नाटी डालते हैं। पूरी रात भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु ठाकुर के भजनों का गुणगान करते हैं, जिससे मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। ब्रह्ममुहूर्त होते ही भगवान श्रीकृष्ण को पालकी में विराजित किया जाता है। शंख ध्वनि और ढोल-नगाड़ों की थाप पर भगवान मंदिर से बाहर निकलते हैं। ग्रामीणों द्वारा पहले से ही होलिका दहन की सारी तैयारियां कर दी जाती हैं। भगवान की उपस्थिति में भक्तों के साथ विशाल जलती मशालों के साथ होलिका दहन की रस्म निभाई जाती है। इस दौरान पूरा क्षेत्र हरि बोल और राधे-कृष्ण के जयघोष से गूंज उठता है। मंदिर के कारदार रामानंद शर्मा का कहना है कि यह परंपरा अत्यंत प्राचीन है और इसे आज तक बदला नहीं गया है। वे इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ निभा रहे हैं। वहीं, मंदिर के पुजारी रमेश शर्मा का कहना है कि ठाकुर श्रीकृष्ण अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं की भगवान के प्रति अपार श्रद्धा है। मंदिर कमेटी के कोषाध्यक्ष जवाहर लाल ठाकुर ने बताया कि आनी क्षेत्र का यह पारंपरिक फाग उत्सव है। इस दौरान ब्रज की होली की झलक देखने को मिलती है, जिसमें गुलाल और अबीर उड़ाकर भक्त आनंदित होते हैं। यह उत्सव खुशहाली और भाईचारे का प्रतीक माना जाता है। पुजारी रमेश शर्मा का कहना है कि यहां भगवान कृष्ण मुरलीधर की अति प्राचीन मूर्ति है, जिसपर भक्तों की अपार श्रद्धा है। भगवान श्रीकृष्ण भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण करते हैं। ठाकुर मुरलीधर मंदिर में हर साल आयोजित होने वाला यह उत्सव श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक आनंद और रंगों का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने के लिए हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं और होली के इस पावन पर्व को यादगार बना देते हैं।
केमिकल रंगों से बचें
बीएमओ आनी डॉ. भागवत मेहता ने बताया कि होली के पर्व में रंग देख कर खरीदें, मिलावटी या अन्य ऐसी किसी तरह का केमिकल रंगों में इस्तेमाल न करें। इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।