किन्नौर में वर्दी, किताबों और फीस को लेकर गाइडलाइन जारी
भवन, विकास और इंफ्रास्टक्चर फंड के नाम पर एक पैसा नहीं ले पाएंगे स्कूल प्रबंधन
अभिभावकों के हितों की रक्षा और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की जा रही सुनिश्चित : गौतम
संवाद न्यूज एजेंसी
रिकांगपिओ (किन्नौर)। जिला किन्नौर में निजी स्कूलों की ओर से पाठ्य पुस्तकों, वर्दी और शुल्कों के नाम पर की जाने वाली मनमानी को रोकने के लिए शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। विभाग ने जिले में संचालित सभी निजी शिक्षण संस्थानों, चाहे वे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला से संबद्ध हों या सीबीएसई और सीआईएससीई नई दिल्ली से, उनके लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा के नाम पर व्यावसायिक लाभ कमाने वाले संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा।
शिक्षा विभाग किन्नौर की ओर से जारी निर्देशों के तहत अब कोई भी निजी स्कूल अपने विद्यालय परिसर के भीतर जूते, कपड़े, किताबें या किसी भी प्रकार की स्टेशनरी बेचने का कार्य नहीं कर सकेंगे। अकसर यह देखा गया है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों पर किसी खास दुकान या विक्रेता से ही सामान खरीदने का दबाव बनाते हैं, लेकिन अब विभाग ने इसे पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है। अभिभावक अपनी सुविधा और बजट के अनुसार खुले बाजार से कहीं से भी सामग्री खरीदने के लिए स्वतंत्र होंगे। इसके अलावा स्कूल का लोगो लगी कॉपियां खरीदने के लिए भी छात्रों को मजबूर नहीं किया जा सकेगा। पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से विभाग ने आदेश दिया है कि प्रत्येक शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले स्कूल प्रबंधन को पीटीए के माध्यम से जनरल हाउस आयोजित करना अनिवार्य होगा। इस बैठक में अभिभावकों की मौजूदगी में आगामी सत्र की फीस संरचना पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में लिए गए निर्णयों और निर्धारित फीस के विवरण को स्कूल के सूचना पट और आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा, ताकि किसी भी प्रकार का गुप्त शुल्क न वसूला जा सके। विभाग ने उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश की ओर से 27 अप्रैल 2016 को दिए गए आदेशों का कड़ाई से पालन करने की हिदायत दी है। इसके अंतर्गत स्पष्ट किया गया है कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों से बिल्डिंग फंड, डेवलपमेंट फंड या इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के नाम पर एक पैसा भी नहीं वसूलेगा। यह कदम उन अभिभावकों के लिए बड़ी राहत है जिन्हें अक्सर विकास शुल्क के नाम पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ सहना पड़ता था। शिक्षा विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय इन निर्देशों की अवहेलना करता है या अभिभावकों को चिह्नित दुकानों से सामान लेने के लिए विवश करता है, तो उसके विरुद्ध शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 और हिमाचल प्रदेश संबद्ध अधिनियम 1997 तथा 2003 के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया भी तुरंत शुरू कर दी जाएगी।
कोट
किन्नौर के उप निदेशक स्कूल शिक्षा (प्रारंभिक) अरुण गौतम ने बताया कि यह निर्देश अभिभावकों के हितों की रक्षा और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जारी किए गए हैं। उन्होंने सभी स्कूल प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को इन आदेशों का तत्काल प्रभाव से अक्षरश: पालन करने के निर्देश दिए हैं।