रोहडू मेले में बिकने के लिए आई गुच्छी। संवाद
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रोहड़ू। राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले में इस बार गुच्छी के दाम छह हजार रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। सूखे के कारण जंगलों में गुच्छी की पैदावार कम हुई है। बाजार में ग्रामीण क्षेत्रों से कम गुच्छी पहुंच रही है। राज्य स्तरीय रोहड़ू मेले में गुच्छी का करोड़ों रुपये का कारोबार होता है।
गुच्छी मार्च माह से निकलनी शुरू होती है। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग गुच्छी तलाशने में मार्च माह से जुट जाते हैं। दो से तीन महीने गुच्छी से लोगों को अच्छा रोजगार मिलता है। पिछले साल अप्रैल महीने में कोविड के दौरान भी गुच्छी के दाम छह से सात हजार रुपये प्रति किलोग्राम रहे थे। इस बार मार्च महीने में गुच्छी की बिक्री तीन हजार रुपये किलोग्राम से शुरू हुई। एक महीने में दाम दोगुने हो चुके हैं। रोहड़ू मेले में पांच साल पहले चौदह हजार रुपये प्रति किलोग्राम गुच्छी बिकी थी। इस बार भी गुच्छी के दाम में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इस बार अधिक हिमपात जरूर हुआ, लेकिन उसके बाद लगातार सूखे से गुच्छी की पैदावार प्रभावित हो रही है। गुच्छी के लिए आजकल पर्याप्त नमी जरूरी है। मई महीने तक लोग गुच्छी जंगलों में तलाश कर सूखाने के बाद बिक्री के लिए बाजार में पहुंचाते हैं। मेले में गुच्छी खरीदने के लिए बाहर से व्यापारी पहुंच रहे हैं।
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औषधीय गुणों से भरपूर होती है गुच्छी
जंगलों में मिलने वाली गुच्छी को औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। देश के बडे़ होटलों में गुच्छी की सब्जी को परोसा जाता है। यहां से अधिकांश गुच्छी विदेशों को निर्यात होती है। जानकार बताते हैं कि गुच्छी को पैंसलिन सहित कई अन्य दवाओं में प्रयोग किया जाता है।