प्रशासन के निर्देशों की अनदेखी, चौपाल में बागवानों का बगीचों में अपशिष्ट जलाना जारी
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संवाद न्यूज एजेंसी चौपाल (रोहड़ू)। चौपाल उपमंडल में बगीचों से उठ रहे धुएं के गुबार पर्यावरण की सांसें घोंट रहे हैं। यहां सेब बहुल क्षेत्रों में प्रशासन के निर्देशों के बावजूद बागवान बगीचों में काट-छांट के बाद अपशिष्ट को जला रहे हैं, जिससे उठने वाला धुआं पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है। प्रशासन ने कई बार बागवानों को चेतावनी जारी की, इसके बावजूद कुछ बागवान नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। चौपाल के जंगलों और बगीचों से उठते धुएं से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है। बगीचों में जलती झाड़ियों से निकलने वाला धुआं आसपास के गांवों तक फैल रहा है, जिससे क्षेत्र में दृश्यता (विजिबिलिटी) में कमी आई है और लोगों को सांस लेने में दिक्कत आ रही है। बुजुर्ग, बच्चे, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों को अधिक दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि आग बगीचों से जंगलों तक फैल सकती है, जो बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इससे जैव विविधता, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों को भारी नुकसान होगा। प्रशासन ने बगीचों में झाड़ियों को जलाने पर प्रतिबंध लगाया है और बागवानों को अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से खाद बनाने की सलाह दी है। इसके बावजूद बागवान नियमों का उल्लंघन कर कर रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञ और सामाजिक संगठनों का कहना है कि सिर्फ चेतावनी देना पर्याप्त नहीं होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना, कानूनी कार्रवाई और बगीचों का नियमित निरीक्षण आवश्यक है। साथ ही, जागरूकता अभियानों के जरिये बागवानों को यह समझाना जरूरी है कि झाड़ियां जलाने से उनके ही बगीचों और फसलों को दीर्घकालीन नुकसान होगा।
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प्रशासन से तेजी से निगरानी और कठोर कार्रवाई की अपील
क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता विशाल चौहान, झिकनीपुल पंचायत के प्रधान गोपाल चौहान और नरेंद्र पांटा समेत पर्यावरण प्रेमी बताते हैं कि कुछ बागवानों की मनमानी पूरे इलाके के लिए गंभीर खतरा बन गई है। उन्होंने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई और नियमित निगरानी की मांग की है।
चौपाल के एसडीएम हेमचंद वर्मा ने बताया कि बगीचों और जंगलों में आग न लगाने को लेकर पहले ही एडवाइजरी जारी की गई है। कोई आग लगाता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
चौपाल में सेब के बगीचों में जलाई जा रही टहनियां और उनसे उठ रहा धुंआ। संवाद