हर वर्ष प्राकृतिक आपदा के चलते बागवानों को झेलना पड़ता है आर्थिक नुकसान
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ओलावृष्टि से सेब की फसल को बचाने के लिए बागवान बगीचों में लगा रहे एंटी हेलनेट संवाद न्यूज एजेंसी निरमंड (कुल्लू)।
निरमंड के ऊपरी सेब बहुल क्षेत्रों में बागवानों ने बगीचों में जालियां (एंटी हेलनेट) लगाने का काम शुरू कर दिया है। सेब की फसल को ओलावृष्टि से बचाव के लिए बागवान बगीचों में एंटी हेलनेट लगा रहे हैं। चायल, अरसू और जुआगी समेत अन्य क्षेत्रों के बगीचों में जालियां लगाकर सेब के पेड़ों को सुरक्षा कवच दे रहे हैं। हर वर्ष ओलावृष्टि के कारण सेब की करोड़ों की फसल को नुकसान पहुंचता है। कई बार बागवानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर जाता है। ओलावृष्टि से सेब दागी हो जाता है। इस कारण मंडियों में उचित दाम नहीं मिलते। इस महीने के अंत तक करीब सभी सेब के बगीचों में फूल आने भी शुरू हो जाएंगे। बागवान लाल सिंह ने कहा कि इस वर्ष फूल आने की प्रक्रिया समय से पहले शुरू हाे रही है। मौसम अनुकूल रहा, तो अच्छी फसल की उम्मीद है। ओलावृष्टि से सेब और अन्य फलों को दागी होने से बचाने के लिए एंटी हेलनेट लगाना जरूरी है। बड़े बागवानों के साथ मध्यम वर्गीय बागवानों ने भी सेब के बगीचों में एंटी हेलनेट लगाना शुरू कर दिया है ताकि सेब फसल को सुरक्षित किया जा सके और मंडियों में अच्छे दाम मिले।
इन दिनों एंटी हेलनेट लगाना सही
बागवानी विभाग आनी के विषयवाद विशेषज्ञ बलबीर चौहान ने बताया कि यूं तो एंटी हेलनेट डालने का सही समय सेब के पौधों पर फूल आने के बाद रहता है। आनी और निरमंड की बात करें, तो इन क्षेत्रों में कुछ वर्षों से यहां समय से पूर्व ही फरवरी के अंत या मार्च में ओलावृष्टि हो रही है, जिसके चलते इन दिनों एंटी हेलनेट लगाना सही है।