बागवान डेढ़ गुने दामों पर बाजार से दवाई खरीदने को मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहडू। सेब के बगीचों में लगातार संक्रमण बढ़ता जा रहा है। हिमाचल में बागवानों को सेब के पौधों पर छिड़काव करने के लिए मिलने वाली सस्ती दवाईयां उद्यान विभाग के कार्यालय में नहीं मिल रही हैं। लिहाजा, बागवानों को महंगे दामों पर बाजार से दवाईयां खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। विषय विशेषज्ञ उद्यान कार्यालय रोहडू के तहत चिड़गांव टिक्कर, जांगला तहसील व उपतहसील के बागवानी क्षेत्र आते हैं। इस क्षेत्र में प्रदेश का बड़े स्तर पर सेब का उत्पादन होता है। इस क्षेत्र में करीब एक दर्जन उद्यान विभाग के दवाईयां उपलब्ध करवाने के लिए केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों पर बागवानों को विभाग की ओर से दवाईयां 25 से 50 प्रतिशत तक के अनुदान पर उपलब्ध करवाई जाती हैं, लेकिन इस साल शुरू से ही बागवानों को दवाईयों की पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो रही। प्रदेश संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान का कहना है कि उद्यान विभाग के कार्यालय से सस्ते दामों पर मिलने वाली दवाईयां इस साल बागवानों को पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि सेब के बगीचों में माईट, मासोर्निना, अल्टरनेरिया लगातार फैल रहा है। इसको नियंत्रण करने के लिए बागवानों को मजबूरन छिड़काव के लिए दवाईयां महंगे दामों पर बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। पौधों पर छिड़काव का समय बीतता जा रहा है। इसके चलते उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ रहा हैग सरकार की ओर से दवाएं समय पर न मिलने के कारण बागवानों को डेढ़ गुणा अधिक कीमतों पर दवाइयां खरीदनी पड़ रही हैं। उन्होंने सरकार से समय पर सभी केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में दवाईयां उपलब्ध करवाने की मांग की है।
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बीच में कुछ दवाईयों की सप्लाई बहुत कम मात्रा में मिली है। उसको बांट दिया गया है। कुछ दवाईयों की उच्च कार्यालय को डिमांड भेज दी गई है। उम्मीद है जल्द ही पर्याप्त मात्रा में दवाईयों की सप्लाई पहुंच जाएगी।
-डाॅ. संजय चौहान, बागवानी विशेषज्ञ