राजेश हंसरेटा
रोहड़ू। उपमंडल में जलवायु परिवर्तन से जहां बागवानी खतरे में है, वहीं वन भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण ने भी पर्यावरण को खतरे में डाल दिया है। जहां कभी हरे-भरे जंगल थे आज वहां सेब के बगीचे लगे हैं। रोहड़ू वन मंडल के अंतर्गत जुब्बल और रोहड़ू क्षेत्र में अतिक्रमणकारियों ने 800 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि पर कब्जा किया हुआ है। अतिक्रमण के करीब 2,500 मामले दर्ज हैं। इनमें अधिकांश मामले विचाराधीन हैं। अतिक्रमण के करीब 50 ऐसे मामले हैं, जिन पर बेदखली के आदेश उच्च न्यायालय ने दिए हैं। इन पर वन विभाग की ओर से कार्रवाई जारी है। कब्जा की गई वन भूमि पर अतिक्रमणकारियों ने आलीशान बंगले खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात है कि वन भूमि पर बनाए गए इन भवनों को बिजली और पानी के कनेक्शन तक संबंधित विभागों ने दिए हैं। वन खंड जुब्बल व सरस्वतीनगर में वन भूमि पर बने आठ मकान, चिड़गांव वन परिक्षेत्र में करीब तीन मकानों को उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद वन विभाग ने अपने कब्जे में तो लिया, लेकिन इनमें से कुछ मामले में लोग सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं। उपमंडल में बढ़े स्तर पर हुए अतिक्रमण को छुड़वाना वन विभाग के लिए भी टेडी खीर बन गया है। किसान सभा के नेता भी अतिक्रमण के खिलाफ हो रही कार्रवाई में रुकावट बन रहे हैं। ऐसे ही एक मामले में वन विभाग की टीम जुब्बल के बढ़ाल गांव में चार बार अतिक्रमण हटाने गई, लेकिन उन्हें किसान सभा के विरोध के बाद खाली हाथ ही वापस लौटना पड़ा। इस संबंध में वन विभाग ने रिपोर्ट उच्च न्यायालय में दे दी है। ऐसे में अब वन विभाग भी अतिक्रमण के मामलों में उच्च न्यायालय के निर्देशों का इंतजार कर रहा है।
वन विभाग उच्च न्यायालय के आदेशानुसार कार्रवाई कर रहा है। अतिक्रमण के मामले में जैसे ही कोई निर्देश उच्च न्यायालय से आएंगे तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
- रवि शंकर शर्मा, डीएफओ रोहड़ू