2015 और 2025 की तबाही के बाद भी स्थायी सुरक्षा के नहीं हो पाए इंतजाम
कस्बे के लोगों को अब बरसात में फिर से सताने लगा आपदा का डर
जल शक्ति विभाग ने भेजी 15 करोड़ की डीपीआर, अब तक नहीं मिली मंजूरी
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)।
बरसात शुरू होते ही आनी कस्बे के खड्ड के किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ जाती है। वर्षों से खड्डों के तटीकरण और सुरक्षा को लेकर बैठकें, सर्वे और योजनाएं बनती रहीं लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। सरकार, प्रशासन और संबंधित विभाग आज दिन तक आनी कस्बे के लोगों को राहत नहीं पहुंचा पाए हैं। नतीजतन, हर बरसात में कई परिवार खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। आनी का इतिहास भी इस खतरे की गवाही देता आ रहा है। वर्ष 1977 में आई भीषण बाढ़ ने यहां का भूगोल ही बदल दिया था। उस समय आनी खड्ड ने अपना बहाव बदलते हुए कराणा पंचायत की ओर रुख कर लिया, जिससे कराणा पंचायत की राजस्व भूमि आज भी आनी पंचायत की ओर स्थित है। उसी बाढ़ में 23 स्थानीय लोगों के ढारे बह गए थे। इसके बाद 1978, 2015 और हाल के वर्षों में भी आई बाढ़ ने लगातार भारी नुकसान पहुंचाया है। वर्ष 2015 में नालदेरा खड्ड की बाढ़ ने खड्ड के किनारे बने कई घर तबाह कर दिए। उस दौरान गोशालाओं, तीन पुलियों और संपर्क मार्गों को भी भारी नुकसान पहुंचा था। वहीं, 2025 में देहुरी खड्ड में आई बाढ़ से मिशन कॉलोनी से लेकर पुराने बस अड्डे तक भारी क्षति हुई। कुछ स्थानों पर सुरक्षा दीवारें बनाई गईं, लेकिन पूरा क्षेत्र आज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा रहा। नालदेरा खड्ड आनी और नमहोंग पंचायतों की सीमा पर स्थित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले आई सरकारी राशि से आनी पंचायत की ओर तो तटीकरण कार्य किया गया लेकिन नमहोंग पंचायत की ओर पर्याप्त सुरक्षा कार्य नहीं हो सका, जिससे वह हिस्सा आज भी संवेदनशील बना हुआ है। उपमंडल मुख्यालय में चार खड्डें बहती हैं और सभी में तटीकरण के पुख्ता प्रबंध नहीं हो पाए हैं। यदि इस बार भारी बरसात तबाही मचाती है, तो उससे निपटने के लिए यहां कोई सुरक्षा उपाय नहीं है। वहीं खड्डों में ठिकाने लगाए जा रहे मलबे से भी आपदा के वक्त नुकसान बढ़ सकता है।
लोगों ने कहा
- कस्बेवासी व्यापार मंडल आनी के अध्यक्ष विनोद चंदेल का कहना है कि यदि आनी खड्ड में बाढ़ आती है, तो हिमालयन मॉडल स्कूल से किरण बाजार और बराड़ क्षेत्र तक गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। उन्होंने पूरे क्षेत्र में तटीकरण कराने और खड्डों में हो रही अवैध डंपिंग पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की।
-व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष फकीर चंद वर्मा ने कहा कि देहुरी खड्ड पर कुछ स्थानों पर केवल एक तरफ ही सुरक्षा कार्य हुआ है। यदि बाढ़ के दौरान कोई बड़ा पत्थर खड्ड में फंस गया, तो रघुवीर स्टेडियम, रेस्ट हाउस, आसपास के मकानों और रास्तों को भारी नुकसान हो सकता है। उन्होंने दोनों किनारों पर मजबूत तटीकरण की मांग उठाई।
-वार्ड सदस्य छविंद्र शर्मा का कहना है कि खड्ड किनारे मजबूत तटीकरण के साथ-साथ बड़े स्तर पर पौधरोपण भी जरूरी है ताकि कटाव को रोका जा सके। उन्होंने सरकार से आनी कस्बे को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करने की मांग की।
खड्डों के तटीकरण के लिए लगभग 15 करोड़ रुपये की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर उच्च अधिकारियों के माध्यम से नाबार्ड की स्वीकृति के लिए भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही परियोजना पर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। लक्ष्मण सिंह कनेट, एसडीएम आनी
प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिगत संवेदनशील बना आनी कस्बा। संवाद
प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिगत संवेदनशील बना आनी कस्बा। संवाद
प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिगत संवेदनशील बना आनी कस्बा। संवाद
प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिगत संवेदनशील बना आनी कस्बा। संवाद
प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिगत संवेदनशील बना आनी कस्बा। संवाद