रामपुर बुशहर। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन ने शिक्षा क्षेत्र में अतिरिक्त 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के फैसले का विरोध किया है। तुरंत प्रभाव से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है। साथ ही कोरोना महामारी के चलते प्रदेश भर के कॉलेजों में शिक्षारत छात्रों का साल बरबाद होने से बचाने के लिए छात्रों को प्रमोट करने का भी मुद्दा उठाया है।
एनएसयूआई प्रदेश महासचिव मनोज चौहान ने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को ज्ञापन भेजा। ज्ञापन के माध्यम से एनएसयूआई ने कहा कि कोरोना संकट के कारण कॉलेजों की वार्षिक परीक्षाओं में पहले से ही बहुत देरी हो चुकी है और भविष्य को लेकर भी छात्रों में अनिश्चितता बनी हुई है। प्रदेश के सभी छात्र-छात्राएं अपनी शिक्षा, समय और कैरियर को लेकर मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रहे हैं। एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि कॉलेजों के प्रथम और द्वितीय वर्ष के छात्रों को उनकी पिछली परफॉरमेंस के आधार पर ही बिना परीक्षा के अगले वर्ष में प्रमोट किया जाए और अंतिम वर्ष के छात्रों को उनके पिछले परफॉरमेंस में अतिरिक्त 10 प्रतिशत अंकों को जोड़ कर प्रमोट किया जाए। एनएसयूआई ने मुख्यमंत्री से विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से शिक्षा में 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के फैसले को वापस लेने और भविष्य में भी शिक्षा पर कोई अतिरिक्त टैक्स न लगाने की मांग की है। संगठन ने प्रदेश विश्वविद्यालय की ओर से विभिन्न गैर शिक्षक पदों के लिए ली जा रही भारी भरकम आवेदन फीस पर भी विरोध जताया है। रामपुर कॉलेज के परिसर अध्यक्ष सूरज जोंगा ने कहा कि छात्रों को डायरेक्ट प्रमोट करने की मांग को लेकर रामपुर एनएसयूआई के छात्रों ने स्थानीय एसडीएम के माध्यम से सरकार को मांग पत्र भेजा था। एनएसयूआई के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत छात्र हितों की मांग पर कोरोना काल में छात्रों का साल बरबाद होने से बचाने के लिए देशभर के कई विश्वविद्यालयों सहित दिल्ली विवि ने भी छात्रों को डायरेक्ट प्रमोट करने का फैसला लिया है और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को भी छात्रों को राहत देनी चाहिए।