लोगों की मांग, जंगलों में छोटे-छोटे तालाब बनाए जाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कोटखाई (रोहड़ू)।
अब लोगों को इंतजार है कि आसमां से कब राहत बरसेगी, क्योंकि जमीन पर सूखा आफत बन गया है। कोटखाई क्षेत्र में लंबे समय से बारिश और बर्फबारी न होने के कारण जलस्तर लगातार गिरता जा रहा है। इसका सीधा असर पेयजल आपूर्ति और बागवानी पर पड़ रहा है। यदि समय रहते बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो आने वाली गर्मियों में भारी पेयजल किल्लत झेलनी पड़ सकती है। क्षेत्र की अधिकांश पेयजल योजनाएं नदी-नालों पर निर्भर हैं, लेकिन लगातार सूखे हालात के चलते पानी के कई प्राकृतिक स्रोत सूख चुके हैं। वहीं, बगीचों में नमी पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे बागवानी कार्य और नए पौधों को रोपने का कार्य बागवानों के लिए बेहद मुश्किल होता जा रहा है। बागवानों का कहना है कि यदि यही हालात बने रहे, तो इसका असर आने वाले वर्षों की फसल पर भी पड़ेगा, जो बागवानी क्षेत्र के लिए खतरे की घंटी है। बागवान मोहित चौहान, ब्रिज लाल, राजेश पुरटा और राकेश चौहान ने बताया कि पानी के स्रोतों को जीवित रखने के लिए चेक डैम और जंगलों में छोटे-छोटे तालाब बनाना बेहद जरूरी है। इससे बारिश के पानी का संरक्षण होगा और भू जल स्तर को भी सहारा मिलेगा। कुल मिलाकर मौसम की बेरुखी ने जहां लोगों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं जल संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाला समय पेयजल और बागवानी दोनों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
जल संरक्षण के लिए विभाग देगा सहयोग
डीएफओ ठियोग मनीष रामपाल ने कहा कि यदि स्थानीय लोगों की ओर से तालाब निर्माण की मांग आती है, तो प्रस्ताव को उच्च अधिकारियों की स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। जल संरक्षण के लिए विभाग हर संभव सहयोग देने को तैयार है।