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Rampur Bushahar News: बारिश न होने से रामपुर में सेब बगीचों के कार्य अटके

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बागवान रोहित कायथ
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तीन माह से चल रहा ड्राई स्पेल, बागवानों की बढ़ीं दुश्वारियां समय पर बर्फबारी और बारिश न होने से करोड़ों के सेब कारोबार पर संकट
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सेब के पेड़ों में कैंकर सहित अन्य बीमारियों का भी बढ़ रहा खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी

रामपुर बुशहर। तीन माह से लगातार चल रहे ड्राई स्पेल (शुष्क मौसम) के कारण बागवानों की चिंता बढ़ गई है। बारिश न होने के कारण बागवान अपने बगीचों में प्रबंधन के कार्य नहीं कर पा रहे हैं। समय पर बर्फबारी और बारिश न होने से आगामी समय में करोड़ों के सेब कारोबार पर संकट खड़ा हो सकता है, वहीं सेब के पेड़ाें में कैंकर सहित अन्य बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। ऐसे में हजारों बागवान चिंतित हैं।
प्रूनिंग का काम लटका
बारिश न होने से सेब के पेड़ों से अभी तक पत्ते नहीं गिर रहे हैं। इस कारण बागवान अपने बगीचों में प्रूनिंग का कार्य नहीं कर पा रहे हैं। सेब के पेड़ों की कांट-छांट यानी प्रूनिंग सही समय पर होने से कई फायदे हैं। इससे जहां पेड़ों का आकार नियंत्रित किया जा सकता है, वहीं पेड़ों को स्वस्थ वृद्धि मिलती है और पेड़ों में फूल व फल उत्पादन में बढ़ावा मिलता है। साथ ही पेड़ों में सूरज की रोशनी और हवा का संचार बेहतर होता है, जोकि सेब के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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बारिश न होने के कारण जमीन से नमी गायब हो रही है और बागवान बगीचों में तौलिए नहीं बना पा रहे हैं। साथ ही सेब के नए पौधे लगाने के लिए गड्ढे बनाने का कार्य अटक गया है। सेब बाहुल ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात से पूर्व सेब बगीचों के प्रबंधन के कार्य बागवान निपटाना चाहते हैं, ताकि समय पर सेब बगीचों के कार्य पूरे हो सकें। यही हाल मध्य और निचले सेब बाहुल क्षेत्रों के बागवानों के हैं। बारिश न होने के कारण बगीचों के प्रबंधन के कार्य लटक गए हैं और खासे परेशान हैं। बागवानों को चिंता सताने लगी है कि कहीं ड्राई स्पेल लंबा चला तो आगामी सेब का उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है और सेब के बगीचों पर बीमारियों का हमला भी हो सकता है।
बागवानों ने जताई चिंता
-12/20 वैली के मझाली गांव के प्रगतिशील बागवान सुनील चौहान ने कहा कि सूखे के कारण बगीचों में तौलिए, गड्ढे का कार्य नहीं कर पा रहे हैं। इन दिनाें में मटर की बिजाई भी की जाती थी और बगीचों में तौलिये और गड्ढों का कार्य किया जाता था।
-रामपुर उपमंडल के दलोग गांव के इंद्रजीत कायथ ने कहा कि बारिश न होने के कारण अभी तक सेब के पेड़ों से पत्ते ही नहीं झड़ रहे हैं। इस कारण प्रूनिंग का कार्य लटका हुआ है।
-देवनगर गांव के विकास लांबा ने कहा कि नवंबर और दिसंबर की बारिश और बर्फबारी बागवानी के लिए संजीवनी मानी जाती है, लेकिन लंबे समय से चल रहे सूखे के कारण जमीन से नमी गायब है और बगीचों के कार्य शुरू नहीं हो रहे हैं। बागवान पूरी तरह से हताश हैं।
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-कंछीण घोड़ी के रोहित कायथ ने कहा कि बारिश न होने के कारण सेब के पेड़ों में कैंकर रोग लगने का खतरा पैदा हो रहा है। यदि जल्द ही बारिश नहीं हुई तो आगामी समय में सेब कारोबार पर संकट मंडरा सकता है।

बागवान रोहित कायथ

बागवान रोहित कायथ

बागवान रोहित कायथ

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