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Rampur Bushahar News: चिकित्सकों के तबादलों से चरमराई व्यवस्था, ठियोग अस्पताल में ऑपरेशन बंद

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ठियोग अस्पताल का भवन। संवाद
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दो साल से नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड, ऑटो एनालाइजर मशीन भी खराब
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50 पंचायतों के ग्रामीणों की बढ़ीं मुश्किलें, शिमला जाने को मजबूर मरीज


संवाद न्यूज एजेंसी

ठियोग (रामपुर बुशहर)। ठियोग के सिविल अस्पताल से एक महीने में चार चिकित्सकों के तबादले हो गए। अब स्टाफ की भारी कमी से अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई है। एनेस्थीसिया चिकित्सक के तबादले के बाद अस्पताल में ऑपरेशन पूरी तरह बंद हो गए हैं। यही नहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ, नेत्र चिकित्सक और मेडिसिन विशेषज्ञ के पद भी रिक्त हैं। हालांकि, स्त्री रोग विशेषज्ञ का पद जल्द भरने की उम्मीद है। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को उपचार के लिए शिमला के अस्पतालों और आईजीएमसी जाना पड़ रहा है। अस्पताल में फार्मासिस्ट और स्टाफ नर्सों के पद भी खाली हैं। ऐसे में रोजाना पहुंचने वाले 400 से अधिक मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं देना चुनौती बन चुका है। वहीं, अस्पताल की ऑटो एनालाइजर मशीन कई महीने से खराब पड़ी है। दो साल से अल्ट्रासाउंड मशीन भी काम नहीं कर रही है। मरीजों को बाहर महंगे दामों पर टेस्ट करवाने पड़ रहे हैं। ठियोग अस्पताल केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि चौपाल, शिमला ग्रामीण और कोटखाई क्षेत्रों की 50 पंचायतों के ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाता है।

चिकित्सकों के चार पद रिक्त हैं। इसके अलावा अस्पताल में स्टाफ नर्स और फार्मासिस्ट के पद भी खाली हैं। पदों को भरने के लिए लिखित मांग की गई है। -पवन शर्मा, अस्पताल प्रभारी
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कागजों तक सीमित घोषणाएं

विधानसभा में स्थानीय विधायक कुलदीप सिंह राठौर कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने ठियोग दौरे के दौरान ठियोग अस्पताल को जिला अस्पताल का दर्जा देने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक यह घोषणा केवल कागजों तक ही सीमित है। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने भी अस्पताल में बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया था, लेकिन उपचार सुविधाएं ने मिलने से अब जनता में भी भारी रोष है। शिमला के अस्पतालों में बढ़ती भीड़ का बोझ कम करने के लिए ठियोग सिविल अस्पताल बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, लेकिन चिकित्सकों की कमी, मशीनों की खराबी और प्रशासनिक लापरवाही ने इस अस्पताल को खस्ताहाल बना दिया है।
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