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नीट परीक्षा परिणाम में हुए भ्रष्टाचार की जांच करे सरकार : एसएफआई

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एसएफआई इकाई रामपुर के पदा​धिकारी नीट परीक्षा की निष्पक्ष जांच के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपते
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नीट परीक्षा परिणाम में हुए भ्रष्टाचार की जांच करे सरकार : एसएफआई
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एसएफआई ने तहसीलदार के माध्यम से शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। नीट यूजी परीक्षा का परिणाम 4 जून को घोषित होने के बाद कई शिकायतें सामने आने पर एसएफआई के कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री से जांच करने की मांग उठाई है। एसएफआई रामपुर इकाई ने नीट परीक्षा में हुए भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन पर उचित जांच की मांग को लेकर बुधवार को तहसीलदार रामपुर के माध्यम से भारत के शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा।
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एसएफआई के सचिव राहुल विद्यार्थी ने कहा कि एमबीबीएस, बीडीएस स्नातक स्तरीय प्रवेश परीक्षा में कुल अंक 720 होते हैं। प्रत्येक सही उत्तर के लिए 4 अंक दिए जाते हैं, जबकि प्रत्येक गलत उत्तर के लिए कुल अंक में 1 अंक काटा जाता है। अनुत्तरित प्रश्नों को छोड़ दिया जाता है। 719 और 718 जैसे अंक प्राप्त करना गणितीय रूप से संभव नहीं है, लेकिन ऐसे मामले कई परिणामों में देखे गए हैं। एनटीए ने एक बयान में लापरवाही से कहा है कि इस साल के रिजल्ट में ग्रेस मार्किंग भी हुई है। इस साल परीक्षा से पहले एनटीए के प्रकाशित दिशा-निर्देशों में कहीं भी इस ग्रेस मार्किंग योजना का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। एक ही केंद्र से एक ही क्रम में लगातार रोल नंबर वाले छात्रों को समान अंक मिले हैं, जो प्रसंगवश 720 में से 720 अंक है। रैंक में इस गंभीर वृद्धि के कारण उम्मीदवारों को अब निजी कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मोदी सरकार में जिस तरह से एनएमसी और एनटीए मिलकर मेडिकल शिक्षा का निजीकरण कर रहे हैं, वह देश के भविष्य के लिए खतरनाक है। मेडिकल क्षेत्र में राज्य आधारित संयुक्त प्रवेश परीक्षा प्रणाली को बदलने के लिए अंतहीन भ्रष्टाचार का तर्क था। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया इस घटना की तत्काल पारदर्शी और निष्पक्ष जांच की मांग करता है। एनटीए को खत्म करने और इसके अब तक के सभी घोटालों की जांच करने की मांग करते हैं। एसएफआई देश भर के छात्र समुदाय से एनटीए के माध्यम से शिक्षा केंद्रीकरण के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान करता है।
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