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Rampur Bushahar News: बटाला फाग मेले की रात महिलाएं डालेंगी महानाटी, भक्ति का उमड़ेगा सैलाब

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होली विशेष
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ब्रह्ममुहूर्त में भगवान कृष्ण होलिका दहन के लिए निकलेंगे मंदिर से बाहर
अलौकिक दर्शन करने के लिए उमड़ेगी भक्तों की भीड़
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)। पहाड़ों में जब फाग की खुशबू हवा में घुलने लगती है, तब आनी क्षेत्र का बटाला गांव अपने सबसे बड़े और प्रतीक्षित उत्सव की तैयारी में जुट जाता है। गांव के बीचोबीच स्थित ठाकुर मुरलीधर मंदिर इन दिनों रोशनी, फूलों और श्रद्धा से सजा हुआ है। मौका है सदियों पुराने फाग मेले का, जो न सिर्फ एक उत्सव है, बल्कि यहां की आस्था, संस्कृति और परंपरा की जीवंत कहानी भी है।
दो मार्च की संध्या जैसे-जैसे ढलेगी, वैसे ही मंदिर प्रांगण में रौनक बढ़ने लगेगी। पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाएं मंदिर की ओर बढ़ती हैं। सायं 9:30 बजे ग्राम पंचायत खणी और ग्राम पंचायत बटाला की महिला मंडल मंदिर परिसर में पहुंचेंगे। रात्रि 10:00 बजे ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ भव्य महानाटी आरंभ होगी। दो घंटे तक चलने वाली यह महानाटी दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेगी। नृत्य करतीं महिलाएं मानो अपनी हर थाप में पीढिय़ों पुरानी परंपरा को जीवंत कर देंगी। महिलाओं और पुरुषों की नाटी भव्य होती है।
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रात गहराने के साथ ही उत्सव और रंग पकड़ता है। ठीक 12:00 बजे पुश्तैनी नाटी शुरू होती है, जिसका नाम सुनते ही पूरे क्षेत्र में उत्साह दौड़ जाता है। पुरुष और महिलाएं एक साथ वृत्त बनाकर नाचते हैं। यह नाटी केवल नृत्य नहीं, बल्कि सामूहिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। रात्रि का अंतिम पहर सबसे अधिक रोमांच और भक्ति से भरा होता है। करीब 4:30 बजे फाग बूटी को होलिका दहन के लिए लाया जाएगा। वाद्य यंत्रों की गूंज, भजनों की स्वर लहरियां और जलती मशालों के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है। ब्रह्ममुहूर्त में भगवान श्रीकृष्ण अपनी दिव्य पालकी में विराजमान होकर मंदिर से बाहर निकलते हैं। शंख ध्वनि के साथ जब ठाकुर मुरलीधर भक्तों को दर्शन देते हैं तो हजारों श्रद्धालु स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस करते हैं।
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मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण वर्ष में केवल इसी अवसर पर अपने भक्तों को मंदिर से बाहर आकर दर्शन देते हैं। इसके बाद विधिवत होलिका दहन होता है और भक्तजन भगवान के साथ ब्रज की होली खेलते हैं। कहा जाता है कि इस होली में सम्मिलित होने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।
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